घरेलू हिंसा केस में हाईकोर्ट का अहम फैसला : पति के अलावा परिवार के दूसरे सदस्य भी हो सकते हैं कार्रवाई के दायरे में

बिलासपुर। घरेलू हिंसा से जुड़े एक मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कानूनी कार्यवाही को केवल पति तक सीमित नहीं माना जा सकता। यदि शिकायत में परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ भी आरोप लगाए गए हैं, तो मामले के तथ्यों के आधार पर उनके खिलाफ कार्यवाही आगे बढ़ सकती है। आरोपों की वास्तविकता का फैसला प्रारंभिक स्तर पर नहीं, बल्कि साक्ष्य और गवाहों के परीक्षण के बाद ट्रायल में किया जाना चाहिए।

हाईकोर्ट ने रायपुर की एक निचली अदालत में चल रही कार्यवाही को चुनौती देने वाली बहू और उसके मायके पक्ष के रिश्तेदारों की याचिका खारिज कर दी। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि वे शिकायतकर्ताओं के साथ साझा घर में नहीं रहते, इसलिए घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत उनके खिलाफ मामला नहीं चलाया जा सकता। कोर्ट ने इस दलील के आधार पर कार्यवाही रोकने से इनकार कर दिया।

सास और ननद ने बहू समेत 6 लोगों को बनाया था पक्षकार
मामला रायपुर निवासी निर्मला अग्निवंशी और उनकी बेटी श्रुति अग्निवंशी की शिकायत से जुड़ा है। दोनों ने घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 की धारा 12 के तहत निचली अदालत में आवेदन दिया था। शिकायत में बहू अनिशा अग्निवंशी के अलावा उसके मायके पक्ष से जुड़े सुषमा सिंह, अभिषेक सिंह, अविनाश सिंह, अंजू सिंह और अलका सिंह को भी पक्षकार बनाया गया था। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि उन्हें लगातार मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है और परिवार से अलग करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।

साझा घर में नहीं रहने की दी दलील
बहू और उसके मायके पक्ष के रिश्तेदारों ने हाईकोर्ट में कहा कि उनका शिकायतकर्ताओं के साथ एक ही साझा घर में रहना नहीं है। इसी आधार पर उन्होंने घरेलू हिंसा कानून के तहत चल रही कार्यवाही को समाप्त करने की मांग की। हालांकि, निचली अदालत ने उनकी दलील स्वीकार नहीं की। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

आरोप सही हैं या नहीं, ट्रायल में होगी जांच
हाईकोर्ट ने मामले में लगाए गए आरोपों और दोनों पक्षों के बीच विवाद से जुड़े तथ्यों को प्रारंभिक स्तर पर परखकर कार्यवाही खत्म करने से इनकार किया। कोर्ट के मुताबिक आरोपों की सत्यता का निर्धारण दस्तावेजी साक्ष्यों, गवाहों के बयान और उनके परीक्षण के बाद ही किया जा सकता है। अदालत ने इसी आधार पर बहू और उसके मायके पक्ष के रिश्तेदारों की याचिका खारिज कर दी। अब मामले की सुनवाई निचली अदालत में साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आगे बढ़ेगी।

खबरें और भी हैं...
संबंधित

वर्दी में बॉलीवुड गाने पर रील बनाना टीआई को...

जशपुर। पुलिस की वर्दी में बॉलीवुड गाने पर रील बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर करने का मामला सामने आने के बाद जशपुर में फरसाबहार...

बालोद यूथ कांग्रेस चुनाव में फर्जी वोटिंग का आरोप...

बालोद। छत्तीसगढ़ युवा कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव के बीच बालोद जिले में मतदान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जिला अध्यक्ष पद के...

बालोद में पेयजल संकट को लेकर ग्रामीणों का चक्काजाम...

बालोद। आड़ेझर गांव में लंबे समय से चले आ रहे पेयजल संकट को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश सड़क पर दिखाई दिया। बोईरडीह जलाशय से...

कांकेर में 5 साल की मासूम से दुष्कर्म :...

कांकेर। जिले में मासूम बच्ची से दुष्कर्म के गंभीर मामले में अदालत ने दो आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा...