दुर्ग। राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच, दुर्ग–भिलाई चैप्टर ने शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय दुर्ग में “राष्ट्रीय सुरक्षा सिद्धांत : भारत की आंतरिक सुरक्षा पर प्रभाव” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया। संगोष्ठी का मुख्य फ़ोकस “No More Pakistan” मुद्दे और उसके राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों पर रहा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गोलोक बिहारी राय (सदस्य, केंद्रीय संचालन समिति, राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच) थे। मुख्य वक्ता सेवा निवृत्त मेजर जनरल अनुज माथुर, प्रभारी पश्चिम (रा. सु. जा. मंच) तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. वर्णिका शर्मा (राष्ट्रीय मंत्री प्रथम , रा. सु. जा. मंच) एवं विक्रमादित्य सिंह (राष्ट्रीय संगठन मंत्री , रा. सु. जा. मंच) थे। महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ. एस. एन. झा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।

कार्यक्रम का प्रारम्भ स्वागत उद्बोधन से हुआ, जिसे डॉ. शकील हुसैन (प्राध्यापक, राजनीति विज्ञान) ने प्रस्तुत किया। उन्होंने संगोष्ठी के उद्देश्य और “राष्ट्रीय सुरक्षा सिद्धांत” की प्रासंगिकता को संक्षेप में स्पष्ट किया।
मुख्य वक्ता मेजर जनरल अनुज माथुर ने “NO MORE PAKISTAN” की व्याख्या करते हुए कहा कि इसका तात्पर्य पाकिस्तान नामक देश का समाप्त होना नहीं है, बल्कि आज के आतंक-प्रायोजित पाकिस्तान के स्वरूप का अंत होना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान पाकिस्तान अंतर्विरोधों और आतंकी ढाँचों का केंद्र बन चुका है, जिसके पतन की प्रक्रिया भीतर ही भीतर तेज़ हो रही है।
उन्होने बताया कि किस तरह पाकिस्तान ने फिलिस्तिनियों, बांग्लादेशियों, शियाओं,अहमदियाओं, मुहाजिरों और बलूचों का नरसंहार किया । उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि वस्तुतः बलूचिस्तान भारत के साथ रहना चाहता था। उन्होने बलूचिस्तान और सिंध में चल रहे मुक्ति आंदोलनों को नैतिक समर्थन की आवश्यकता पर बल दिया। मुख्य अतिथि गोलोक बिहारी राय ने पाकिस्तान की आतंकी गतिविधियों की कड़ी आलोचना की और कहा कि विभाजन की पृष्ठभूमि में अंग्रेजों की “फूट डालो और राज करो” नीति ने इस संकट को जन्म दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की जनता स्वयं आतंकवाद और राजनीतिक अस्थिरता से पीड़ित है तथा सरकार पर उनका भरोसा घटता जा रहा है। विश्व में घटने वाली अधिकांश आतंकी घटनाओं की कड़ियाँ पाकिस्तान से जुड़ना एक चिन्ताजनक तथ्य है।
विशिष्ट अतिथि विक्रमादित्य सिंह ने “No More Pakistan” की अवधारणा को उचित ठहराते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर उपलब्ध दस्तावेज़ एवं रिपोर्टें पाकिस्तान की आतंकी पृष्ठभूमि को स्पष्ट रूप से प्रमाणित करती हैं। विशिष्ट अतिथि डॉ. वर्णिका शर्मा ने राष्ट्रीय सुरक्षा के बदलते आयामों तथा भारत की आंतरिक सुरक्षा पर पड़ने वाले अंतरराष्ट्रीय प्रभावों पर प्रकाश डाला।
फैन्स दुर्ग भिलाई चैप्टर के अध्यक्ष और हेमचन्द यादव विवि दुर्ग के प्रथम कुलपति डा एन पी दीक्षित ने देश की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान को स्थायी खतरा बताया। अंत में कार्यक्रम के संयोजक डॉ. शकील हुसैन ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि पाकिस्तान का जन्म ही विरोधाभासों और नफरत के नरेटिव से हुआ था, फलतः पाकिस्तान के विखण्डन के बीज उसमे अन्तर्नीहित है इसलिए उन्होंने कहा कि “नो मोर पाकिस्तान” का स्वर आज एक वैचारिक अनिवार्यता के रूप में उभर रहा है।
संगोष्ठी में लगभग 300 से अधिक प्रतिभागियों की सहभागिता रही, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ, विद्वान, महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। इस अवसर पर राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच एवं शा वि या ता स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय के बीच शोध एवं बौद्धिक व्याख्यानो हेतु एक MOU पर हस्ताक्षर हुए। कार्यक्रम में सीएसवीटीयू के कुलपति डा.अरोड़ा, उच्च शिक्षा के पूर्व एडी डा.राजेश पाण्डेय, वर्तमान संयुक्त संचालक डा.अरूण सिन्हा, ई.वी.एन. पांडेय,पूर्व अध्यक्ष दुर्ग-भिलाई चैप्टर एवं वर्तमान राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य फैन्स, धर्म जागरण मंच के संजय मिश्रा, आरोग्य भारती के डा.प्रदीप चौधरी,चेम्बर आफ कामर्स के अजय भसीन, चार्टर्ड एकाउन्ट संघ के अजय सोमानी, अधिवक्ता संघ के समीर त्रिपाठी, श्री अनूप गटागट, प्रोफेसर अवधेश श्रीवास्तव, शंकराचार्य की प्राचार्य डा.हंसा शुक्ला, प्रोफेसर संजय दास, तरूण साहू, अमित सिंह, राखी भारती, डा.रश्मि गौर,डा.राजेश्वर एवं नगर के अन्य प्रबुद्ध व गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। कार्यक्रम समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

