दुर्ग के जलाराम वाटिका में शुरू हुआ आर्ट ऑफ लिविंग का इंट्यूशन का कोर्स, बच्चों को इस अनूठे कोर्स से मिलेगा संस्कारी और स्मार्ट बनने में मदद

दुर्ग। बच्चों को संस्कारी, स्मार्ट और शार्प बनाना है तो यह कोर्स आपके लिए है। जलाराम वाटिका पुलगांव में दो दिवसीय आर्ट ऑफ लिविंग का इंट्यूशन (प्रजना योग) कोर्स शुरू हुआ है। केवल दो दिनों के कोर्स और प्रतिदिन मात्र 20 मिनट के अभ्यास से वह सब कुछ पा सकते हैं जिसकी आपने कल्पना भी नहीं की है। ऐसा बच्चा केवल आपके परिवार के लिए नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए उपयोगी होगा। यह कोर्स लेने बेंगलुरु से आई हैं इंटरनेशनल फेकल्टी श्रेया चुग और सहयोगी हैं छत्तीसगढ़ की वरिष्ठ प्रशिक्षिका डॉ शैलजा चंद्राकर‌।

इंटरनेशनल फेकल्टी श्रेया चुग ने बताया कि कोर्स में सिखाये तकनीक से बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है। उनकी पढ़ाई में सुधार आता है। इन सबके साथ उन्हें आगे बढ़ने की एक सही दिशा मिलती है। बच्चे के दिमाग में सही समय पर सही विचार आते हैं। मेमोरी तीक्ष्ण होती है। उन्होंने कहा निरंतर अभ्यास से बच्चों का समग्र विकास होता है। उसे अच्छे बुरे की समझ होने लगती है। उनके व्यक्तित्व का विकास होगा।


छत्तीसगढ़ की वरिष्ठ प्रशिक्षिका डॉ शैलजा चंद्राकर ने बताया कि यह कोर्स 8 से 18 साल बच्चों के लिए है। बच्चों के लिए इसलिए क्योंकि उनमें ग्रहण करने और सीखने की क्षमता होती है। वैसे बुद्धि सबमें है केवल उसे तराशने की आवश्यकता होती है। ध्यान और विभिन्न सिखाये तकनीकों से यह किया जा सकता है। उनके साथ हैं वंडर ब्वॉय अनिमेष माजी, जो इस विद्या का अभ्यास बीते आठ सालों से कर रहे हैं।

एक हजार प्रकरणों में पुलिस को किया सहयोग
अनिमेष ने पत्रकारों के समक्ष डेमो भी किया। उनकी शंकाओं का समाधान किया। उन्होंने आंखों पर पट्टी बांध कर बड़ी आसानी से सब कुछ बता दिया जैसे खुली आंखों से देखा है। अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस विद्या को सीखने से पहले वह दिन रात मेहनत करके भी रिजल्ट अच्छा नहीं ला पाता था लेकिन अब उसे क‌ई चीजों का इंट्यूशन हो जाता है। उन्होंने कहा कि इस विद्या के अभ्यास से बच्चे बेहतर कर सकते हैं। आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर का विज़न है कि यह विद्या सीखकर बच्चे अपने परिवार के साथ समाज के लिए उपयोगी बनें। अनिमेष ने बताया कि उनकी तरह और भी बच्चे हैं जो अलग-अलग विधाओं में एक्सपर्ट हैं। उन्होंने बताया कि उनके चारों तरफ हो रही घटनाओं के प्रति सजगता आ जाती है। किसी घटना-दुर्घटना को सुलझाने में उन्होंने महाराष्ट्र और कर्नाटक में पुलिस की परोक्ष रूप से मदद की है। उनकी सहायता से पुलिस को फिजिकल एवीडेंस जुटाने में सफलता मिली है। अनिमेष के साथ उनकी मां अंजना माजी भी आईं हैं।

कोर्स आयोजन में आर्ट ऑफ लिविंग वरिष्ठ प्रशिक्षक हरजीत सिंह, अमन बेलचंदन, वैशाली बढ़े, रश्मि जुनेजा, सारिका गुप्ता सहित दुर्ग-भिलाई के अन्य प्रशिक्षकों का सक्रिय सहयोग रहा।

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