बिलासपुर। नगर निगम के सकरी जोन में प्रॉपर्टी टैक्स की वसूली को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। वार्ड क्रमांक-4 गोकुल नगर के तीन लोगों ने मेयर और निगम आयुक्त से शिकायत कर दावा किया है कि उनसे निर्धारित टैक्स से कई गुना अधिक रकम वसूली गई। शिकायतकर्ताओं ने वसूली की जांच कराने और अतिरिक्त राशि वापस दिलाने की मांग की है।
7,794 की रसीद, 20 हजार लेने का आरोप
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक एक महिला से टैक्स के नाम पर 20 हजार रुपए लिए गए, जबकि उसे महज 7,794 रुपए की रसीद दी गई। आरोप है कि बाकी रकम को लेकर सवाल करने पर संबंधित कर्मचारियों की ओर से कार्रवाई की धमकी दी गई। एक अन्य शिकायतकर्ता ने करीब 5 हजार रुपए के टैक्स के बदले 15 हजार रुपए लिए जाने का आरोप लगाया है। शिकायत के अनुसार सामने आए दो मामलों में कुल 22,206 रुपए की अतिरिक्त वसूली का दावा किया गया है।
टैक्स नहीं देने पर बुलडोजर की धमकी का आरोप
पीड़ितों का आरोप है कि जब उन्होंने अतिरिक्त राशि के बारे में सवाल किया तो उन्हें कथित तौर पर कार्रवाई करने और घर पर बुलडोजर चलाने तक की धमकी दी गई। सोमवार को शिकायतकर्ता अपनी शिकायत लेकर निगम कार्यालय पहुंचे। उनका यह भी आरोप है कि मामले की जानकारी संबंधित वार्ड पार्षद तक पहुंचने के बावजूद उनकी शिकायत पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई।
घर-घर टैक्स वसूली की जांच की मांग
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मामला केवल दो-तीन लोगों तक सीमित नहीं हो सकता। उन्होंने सकरी जोन में घर-घर हुई टैक्स वसूली की जांच कराने की मांग की है। शिकायत में वसूली की रसीद, टैक्स डिमांड, वसूली बुक और निगम खाते में जमा रकम का मिलान कराने की मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक दस्तावेजों का मिलान होने पर वास्तविक वसूली और निगम में जमा राशि के बीच अंतर सामने आ सकता है। सावित्री बाई, देव डहरिया सहित अन्य शिकायतकर्ताओं ने कथित तौर पर अतिरिक्त ली गई राशि वापस कराने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।
स्पायरो के समय से डिमांड में गड़बड़ी के आरोप
शिकायतकर्ताओं ने टैक्स वसूली के साथ-साथ डिमांड घटाने-बढ़ाने से जुड़े पुराने मामलों की भी जांच की मांग उठाई है। उनका दावा है कि स्पायरो कंपनी का ठेका वर्ष 2024 में समाप्त होने के बाद टैक्स और किराया वसूली की जिम्मेदारी निगम ने अपने हाथ में ले ली, लेकिन डिमांड और वसूली में अनियमितता के आरोप अब भी सामने आ रहे हैं। दावा है कि स्पायरो के कार्यकाल के दौरान कुछ दुकानों की निर्धारित डिमांड में 500 से 1000 रुपए तक की कमी कर किराया वसूला गया। ऐसे 50 से अधिक दस्तावेज सामने आने का भी दावा किया गया है, जिनमें निगम की निर्धारित डिमांड और स्पायरो द्वारा तैयार डिमांड में अंतर बताया गया है।
तीन साल में 15 फीसदी किराया बढ़ाने का नियम
शिकायत से जुड़े लोगों के अनुसार नियम के तहत दुकानों के किराए में हर तीन साल में 15 फीसदी की वृद्धि होनी थी। आरोप है कि कुछ मामलों में डिमांड बढ़ाने के बजाय उसे कम कर दिया गया, जिससे निगम को मिलने वाले राजस्व पर असर पड़ा। वहीं, शिकायत सामने आने के बाद निगम आयुक्त ने मामले की जांच कराने और यदि गड़बड़ी पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब जांच में यह स्पष्ट होगा कि निर्धारित टैक्स और वसूली गई राशि के बीच कितना अंतर है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
