भिलाई। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) के हजारों आवासधारियों के लिए राहत भरी खबर सामने आ रही है। लंबे समय से बीएसपी आवासों में रहने वाले परिवारों की समस्या के समाधान की दिशा में सकारात्मक पहल हुई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में बीएसपी के डायरेक्टर इंचार्ज (डीआईसी) एवं उच्च प्रबंधन के साथ हुई महत्वपूर्ण बैठक के बाद आवासधारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
इस पहल में दुर्ग सांसद विजय बघेल और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पाण्डेय की अहम भूमिका बताई जा रही है। दोनों जनप्रतिनिधियों ने लगातार इस मुद्दे को उठाते हुए आवासधारियों के हितों की पैरवी की। बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बीएसपी प्रबंधन को मानवीय दृष्टिकोण अपनाने और निवासियों के हितों को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक समाधान निकालने के निर्देश दिए।

रिटेंशन और थर्ड पार्टी दोनों को मिल सकती है राहत
प्रारंभिक चर्चा और सामने आए संकेतों के मुताबिक, बीएसपी आवासों के रिटेंशन धारकों के साथ-साथ थर्ड पार्टी के रूप में रह रहे परिवारों को भी राहत देने पर विचार किया जा रहा है। दोनों श्रेणियों के आवासधारियों को ₹6 प्रति वर्गफीट की रियायती दर से लाभ दिए जाने की संभावना जताई गई है।
यदि इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलती है, तो भिलाई के विभिन्न सेक्टरों में रहने वाले हजारों परिवारों को आर्थिक राहत मिल सकती है। साथ ही लंबे समय से बनी बेदखली की आशंका और आवास संबंधी अनिश्चितता भी दूर होने की उम्मीद है।
पुराने नियमों में बदलाव की मांग
बैठक के दौरान सांसद विजय बघेल और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने स्पष्ट रूप से कहा कि वर्षों से बीएसपी आवासों में निवास कर रहे नागरिकों के हितों का संरक्षण जरूरी है। उन्होंने प्रबंधन से पूर्व के जटिल नियमों की समीक्षा कर जनहितैषी नीति तैयार करने की मांग रखी।
आधिकारिक आदेश का इंतजार
शासन और बीएसपी प्रबंधन के बीच बनी सैद्धांतिक सहमति के बाद अब विभागीय स्तर पर समीक्षा और आगे की प्रक्रिया पूरी किए जाने की उम्मीद है। इसके बाद आधिकारिक आदेश और विस्तृत दिशा-निर्देश जारी हो सकते हैं।
हालांकि, फिलहाल ₹6 प्रति वर्गफीट की दर से राहत दिए जाने को लेकर अंतिम आधिकारिक आदेश जारी होने की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में हजारों आवासधारियों की निगाहें अब बीएसपी प्रबंधन के औपचारिक फैसले पर टिकी हुई हैं।