छत्तीसगढ़ महिला कोष की योजनाओं का होगा विस्तार, महिलाओं को स्वावलंबी बनाने पर जोर

रायपुर: महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने नवा रायपुर स्थित मंत्रालय में छत्तीसगढ़ महिला कोष की बैठक ली। बैठक में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि शिविर लगाकर अधिक से अधिक महिलाओं तक इन योजनाओं की जानकारी पहुँचाई जाए।

प्रमुख निर्णय और अपडेट:

  • ऋण वितरण: वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए महिला समूहों को 30 करोड़ और सक्षम योजना में 14 करोड़ रुपये के ऋण वितरण को मंजूरी दी गई।
  • नियमों में बदलाव: सक्षम योजना के तहत महिलाओं की आयु सीमा 25 से 50 वर्ष करने और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को भी इसका लाभ देने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई।
  • ब्याज दर: महिलाओं को अपना काम शुरू करने के लिए मात्र 3 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज दर पर ऋण दिया जा रहा है।
  • सॉफ्टवेयर निर्माण: जमा हुए ब्याज की राशि (लगभग 8 लाख रुपये) का उपयोग महिला कोष के नए सॉफ्टवेयर बनाने में किया जाएगा।

बैठक में वित्तीय वर्ष 2024-25 में ऋण योजना के तहत 1500 महिला स्व-सहायता समूहों को 30 करोड़ रुपये तथा सक्षम योजना के तहत 1000 पात्र महिलाओं को 14 करोड़ रुपये के ऋण वितरण की साख योजना के कार्योत्तर अनुमोदन एवं उपलब्धियों की जानकारी दी गई। साथ ही सक्षम योजना, ऋण योजना और स्वावलंबन योजना के लक्ष्यों एवं उपलब्धियों पर भी चर्चा की गई।

बैठक में यह जानकारी दी गई कि महिला स्व-सहायता समूहों को वर्तमान में द्वितीय बार अधिकतम 6 लाख रुपये तक ऋण दिए जाने का प्रावधान है। इसी प्रकार सक्षम योजना के अंतर्गत महिलाओं को अधिकतम 2 लाख रुपये तक का ऋण प्रदान किया जाता है। इन प्रावधानों में आवश्यकता अनुसार संशोधन किए जाने के संबंध में भी विचार-विमर्श किया गया।

सितंबर 2025 की स्थिति में जिलों में कुल 8 लाख 2 हजार 843 रुपये की राशि ब्याज के रूप में जमा होने की जानकारी दी गई, जिसका उपयोग महिला कोष के सॉफ्टवेयर निर्माण के लिए किए जाने पर विचार किया गया। बैठक में कार्यरत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को भी पात्रता के आधार पर सक्षम योजना से लाभान्वित करने तथा योजना में महिलाओं की आयु सीमा 25 से 50 वर्ष करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई।

महिला एवं बाल विकास विभाग की संचालक श्रीमती शम्मी आबिदी ने बताया कि महिलाओं को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ महिला कोष का गठन किया गया है। इसके तहत महिलाओं को मात्र 3 प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे स्वरोजगार और छोटे व्यवसाय प्रारंभ कर आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं।

बैठक में महिला एवं बाल विकास, वाणिज्य एवं उद्योग, आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास, समाज कल्याण, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, ग्रामोद्योग, कृषि, नगरीय प्रशासन, वन तथा कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रतिनिधियों के साथ ही नेहरू युवा केन्द्र, नाबार्ड, छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक, भारतीय स्टेट बैंक तथा यूनिसेफ के प्रतिनिधि उपस्थित थे।


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