उपमुख्यमंत्री अरुण साव और शर्मा ने चंद्रगिरी तीर्थक्षेत्र में विद्यासागर जी की समाधि के किए दर्शन, जैन मुनियों से लिया आशीर्वाद, समाधि स्थल को बताया आध्यात्मिक प्रेरणा स्रोत का केंद्र

डोंगरगढ़। उप मुख्यमंत्री अरुण साव और उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा चंद्रगिरी तीर्थक्षेत्र डोंगरगढ़ में आयोजित “प्रथम समाधि स्मृति महोत्सव” में पहुंचे। यहां श्री साव ने आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी की समाधि के दर्शन किए एवं जैन मुनियों से आशीर्वाद लिया।

साव ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि आचार्य जी की समाधि स्थल लोगों के लिए एक आध्यात्मिक प्रेरणा स्रोत का केंद्र है। उन्होंने कहा कि, युग संत आचार्य विद्यासागर जी महाराज ने अपने जीवन की संध्या में मृत्यु को जीतने के लिए चन्द्रगिरि तीर्थ डोंगरगढ़ को चुना। उन्होंने छत्तीसगढ में 27 दिसम्बर 2023 को सल्लेखना साधना प्रारंभ की और 17 फरवरी 2024 की रात्रि 2:35 पर मृत्युंजयी बनकर समाधी में लीन हो गए। आचार्य जी ने छत्तीसगढ़ की इस भूमि को अपनी साधन से पावन कर दिया।

श्री साव ने कहा कि, एक 22 वर्ष का युवा, जिसने 30 जून 1968 अजमेर राजस्थान में महाकवि दिगम्बराचार्य श्री 108 ज्ञानसागर जी महाराज से दिगम्बर मुनि की दीक्षा ली। उन्होंने कम समय में ही ज्ञान और तप साधना कर उत्कृष्ट आदर्श प्रस्तुत किया। श्रेष्ठ साधना को देखकर गुरु श्री ज्ञानसागर जी महाराज ने 22 नबम्बर 1972 को नसीराबाद, राजस्थान में आचार्य विद्यासागर महाराज जी को आचार्य पद प्रदान किया। महाराज जी ने अनेक ग्रंथों की रचना की।

डिप्टी सीएम साव ने कहा कि, आचार्य विद्यासागर महाराज जी राष्ट्रहित चिन्तक संत शिरोमणि के रूप में प्रसिद्ध हुए। महाराज जी ने उपदेश दिया था कि, भारत में भारतीय शिक्षण पद्धति लागू होनी चाहिए। हमारी सरकार ने यह प्रयास किया है। वहीं अंग्रेजी नहीं भारतीय भाषा में व्यवहार हो। विदेशी गुलामी का प्रतीक इंडिया नहीं, हमें गौरव का प्रतीक भारत नाम देश का चाहिए। लोगों से कहा कि नौकरी नहीं व्यवसाय करो, चिकित्सा व्यवसाय नहीं सेवा है, जैविक खेतीबाड़ी सर्वश्रेष्ठ है। हथकरघा स्वावलम्बी बनने का सोपान है, भारत की मर्यादा साड़ी है, गौशालाएं जीवित कारखाना हैं। मांस निर्यात देश पर कलंक है, शत प्रतिशत मतदान हो, भारतीय प्रतिभाओं का पलायन रोका जाए।

बता दें कि चंद्रगिरी तीर्थक्षेत्र डोंगरगढ़ में अखिल भारतीय विश्वगुरु जैनाचार्य विद्यासागर समाधि स्थल पर 1 से 6 फरवरी तक यानी छह दिवसीय “प्रथम समाधि स्मृति महोत्सव” का आयोजन किया गया है। इसका उद्देश्य आचार्य विद्यासागर जी की शिक्षा को जन जन तक पहुंचाना है।

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