शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के कड़े तेवर: शराब पीकर स्कूल आने वाले शिक्षकों पर होगी FIR और फिर होगी बर्खास्तगी

रायपुर। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के अनुशासनहीन व्यवहार को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। हाल ही में सरगुजा और बस्तर संभाग से कई शिकायतें सामने आई थीं कि कुछ शिक्षक स्कूल में शराब पीकर आते हैं और छात्राओं से छेड़छाड़ जैसी घटनाओं को अंजाम देते हैं। इन गंभीर मामलों पर नए स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला लिया है। शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने साफ कहा है कि अब ऐसे मामलों में ढिलाई बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कुछ स्थानों पर ऐसे शिक्षकों द्वारा नशे में असामाजिक कृत्य किए जाने पर ही कार्रवाई की गई है, लेकिन मंत्री के निर्देश के बाद अब शराब पीकर स्कूल आने पर ही कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मंत्री के मुताबिक, जल्द ही जिला शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।

नशे में स्कूल आने वाले शिक्षकों द्वारा गाली-गलौज करने के साथ ही बच्चों का यौन उत्पीड़न करने जैसे कई मामले सामने आ चुके हैं। इसी तरह कहीं बच्चों से काम करवाने तथा बच्चियों से छेड़खानी की घटनाएं भी हो चुकी हैं। इस मामले में कुछ शिक्षकों को जेल भेजा जा चुका है तो कुछ पर निलंबन की कार्रवाई भी हो चुकी है।

लेकिन मंत्री के निर्देश के बाद अब ऐसे किसी भी मामले में ढील नहीं बरती जाएगी और शराब पीकर आने के मामले में ही कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बताया गया है कि बिलासपुर जिले के मस्तुरी के मचहा प्राथमिक स्कूल के सहायक शिक्षक एलबी संतोष कुमार केंवट को बच्चों के सामने क्लास रूम में बैठकर शराब पीने और हुड़दंग मचाने के आरोप में बर्खास्त किया गया है।

इससे पहले भी गजेन्द्र यादव ने विभाग में व्यावसायिक शिक्षक भर्ती में गड़बड़ी के मामले में एफआईआर दर्ज कराने का आदेश देकर अपने कड़े तेवर दिखाए थे। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद मंत्री की यह सख्त कार्रवाई सरकारी स्कूलों में अनुशासन बहाली की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

शिक्षाविदों और अभिभावकों ने मंत्री के इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि स्कूल बच्चों के भविष्य निर्माण की जगह है और यहां पर शिक्षक अगर शराब पीकर आएंगे तो यह बच्चों के लिए गलत संदेश होगा।

राज्य सरकार का यह निर्णय शिक्षकों को जिम्मेदार और अनुशासित बनाने में मददगार साबित हो सकता है। साथ ही यह संदेश भी जाएगा कि शिक्षा विभाग में लापरवाही और अनुशासनहीनता को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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