जंगल में अतिक्रमण जांच के दौरान बवाल : वन विभाग की टीम से ग्रामीणों की झूमाझटकी, 35 हेक्टेयर वनभूमि पर कब्जे के संकेत

वन विभाग की टीम से ग्रामीणों की झूमाझटकी

गरियाबंद। जिले के करका क्षेत्र के जंगल में अतिक्रमण और पेड़ों की कटाई की जांच करने पहुंची वन विभाग की टीम को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। वन विभाग के मुताबिक मौके पर करीब 50 से 60 ग्रामीण जुट गए और टीम को सरकारी कार्रवाई आगे बढ़ाने से रोकने की कोशिश की गई। इस दौरान विवाद के साथ धक्का-मुक्की और झूमाझटकी की स्थिति भी बनी। हालांकि किसी वन अधिकारी या कर्मचारी के घायल होने की जानकारी सामने नहीं आई है।

वन विभाग की टीम कथित अतिक्रमित वनभूमि का निरीक्षण करने और मौके की स्थिति का आकलन करने पहुंची थी। विभाग का कहना है कि टीम जैसे ही संबंधित क्षेत्र में आगे बढ़ी, ग्रामीणों की भीड़ वहां पहुंच गई और शासकीय कर्मचारियों को उनके काम से रोकने का प्रयास किया गया।

वीडियोग्राफी को लेकर भी विवाद, थाने में आवेदन

विभाग के अनुसार इस घटनाक्रम के दौरान ग्रामीण मुकेश मरकाम को मौके से ले जाया गया। विभाग ने यह भी दावा किया है कि पूरे घटनाक्रम की वीडियोग्राफी की गई। मामले में वीडियो समेत अन्य साक्ष्यों के आधार पर थाना खल्लारी में FIR दर्ज करने के लिए आवेदन दिए जाने की जानकारी सामने आई है।

विस्थापन के दशकों बाद फिर वनभूमि पर विवाद

करका के जंगल में चल रही मौजूदा जांच की पृष्ठभूमि काफी पुरानी है। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार करका पहले वन ग्राम था और सोंढूर बांध के कैचमेंट क्षेत्र में तत्कालीन सीतानदी अभयारण्य का हिस्सा रहा है। सोंढूर बांध के निर्माण के बाद 1980 के दशक में करका गांव का विस्थापन किया गया था। विभागीय अभिलेखों के मुताबिक उस समय करका के 55 लोगों को जल संसाधन विभाग की ओर से मुआवजा दिया गया था। इसके बावजूद बाद के वर्षों में इसी क्षेत्र की ऊंचाई वाली वनभूमि पर दोबारा अतिक्रमण और पेड़ों की कटाई की गतिविधियां सामने आने लगीं।

1,100 से ज्यादा पेड़ों पर गर्डलिंग, 30 हजार पेड़ काटने के संकेत

वन विभाग के मैदानी निरीक्षण में 1,100 से अधिक पेड़ों पर गर्डलिंग के निशान मिलने की बात कही गई है। इसके अलावा बड़ी संख्या में पेड़ों के कटे हुए ठूंठ भी पाए गए हैं। विभाग के शुरुआती आकलन में वर्ष 2016-17 के दौरान करीब 30 हजार पेड़-पौधों की कटाई के संकेत मिलने का दावा किया गया है। GPS आधारित जांच में लगभग 35 हेक्टेयर वनभूमि पर अतिक्रमण के संकेत मिले हैं। हालांकि वन विभाग का कहना है कि जमीन का वास्तविक क्षेत्रफल DGPS आधारित ड्रोन मैपिंग पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

2016 में भी दर्ज हुआ था POR

करका में अतिक्रमण का मामला पहली बार सामने नहीं आया है। विभागीय जानकारी के अनुसार वर्ष 2016 में 22 लोगों के खिलाफ करीब 22 हेक्टेयर घने वन क्षेत्र में कथित अतिक्रमण को लेकर POR दर्ज किया गया था। बाद में वर्ष 2023 में नगरी न्यायालय ने आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था।अब वन विभाग पुराने मामले की पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति को नए सिरे से जांच रहा है। इसके लिए सैटेलाइट इमेजरी, ड्रोन फुटेज, GPS/DGPS मैपिंग और मौके से जुटाए जा रहे साक्ष्यों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

जंगल की कटाई से वन्यजीव कॉरिडोर पर भी असर की चिंता

वन विभाग के मुताबिक करका क्षेत्र वन्यजीवों और हाथियों की आवाजाही के लिहाज से महत्वपूर्ण है। जंगल का क्षेत्र लगातार प्रभावित होने से वन्यजीवों के पारंपरिक आवागमन मार्ग बाधित होने की आशंका है। विभाग का मानना है कि इससे आने वाले समय में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ सकती हैं।

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