नई दिल्ली | भारतीय नौसेना के बेड़े में एक और शक्तिशाली योद्धा शामिल होने जा रहा है। स्वदेशी तकनीक और संसाधनों से निर्मित आईएनएस अंजदीप (INS Anjadip) अब समुद्री सीमाओं की निगरानी के लिए तैयार है। इस युद्धपोत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे पूरी तरह से स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) द्वारा निर्मित ‘विशेष ग्रेड स्टील’ से बनाया गया है।

8 युद्धपोतों के लिए SAIL ने दिया 3,500 टन स्टील
महारत्न कंपनी ‘सेल’ ने गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) द्वारा बनाए जा रहे आठ एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) कार्वेट की श्रृंखला के लिए लगभग 3,500 टन विशेष-ग्रेड स्टील की आपूर्ति पूरी कर ली है। आईएनएस अंजदीप इस श्रृंखला का तीसरा युद्धपोत है। इससे पहले आईएनएस अरनाला और आईएनएस एंड्रोथ को भी ‘सेल’ के स्टील से ही तैयार कर नौसेना में शामिल किया जा चुका है।
इन तीन स्टील प्लांटों ने निभाई मुख्य भूमिका
देश की डोमेस्टिक सप्लाई चेन की मजबूती को दर्शाते हुए, इस विशेष स्टील का उत्पादन ‘सेल’ के तीन प्रमुख एकीकृत इस्पात संयंत्रों में किया गया है:
- भिलाई स्टील प्लांट (छत्तीसगढ़)
- बोकारो स्टील प्लांट (झारखंड)
- राउरकेला स्टील प्लांट (ओडिशा)
‘अभय-श्रेणी’ के जहाजों की लेंगे जगह
आईएनएस अंजदीप और इसके जैसे अन्य कार्वेट नौसेना के पुराने हो रहे ‘अभय-श्रेणी’ के जहाजों की जगह लेंगे। ये तटीय जलक्षेत्र में पनडुब्बी रोधी अभियानों, कम तीव्रता वाले समुद्री कार्यों और खदान बिछाने जैसे ऑपरेशनों में माहिर हैं।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
‘सेल’ ने पिछले कुछ वर्षों में रक्षा स्वदेशीकरण (Defense Indigenisation) में मिसाल पेश की है। कंपनी ने केवल आईएनएस अंजदीप ही नहीं, बल्कि आईएनएस विक्रांत, आईएनएस उदयगिरि, आईएनएस नीलगिरी और आईएनएस सूरत जैसे देश के गौरवशाली युद्धपोतों के लिए भी विशेष स्टील की आपूर्ति की है। यह उपलब्धि विदेशी आयात पर निर्भरता कम करने के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को और मजबूत करती है।
खास बात: आईएनएस अंजदीप का नाम कारवार (कर्नाटक) के पास स्थित 'अंजदीप द्वीप' के नाम पर रखा गया है, जो रणनीतिक रूप से भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।