भिलाई। शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश की नई व्यवस्था को लेकर छात्र संगठन NSUI ने मोर्चा खोल दिया है। राज्य सरकार द्वारा इस सत्र से नर्सरी और प्री-प्राइमरी को आरटीई की प्रवेश प्रक्रिया से बाहर किए जाने के निर्णय के विरोध में NSUI कार्यकर्ताओं ने जमकर प्रदर्शन किया। संगठन ने भिलाई विधायक देवेंद्र यादव और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को ज्ञापन सौंपकर इस जनविरोधी निर्णय को तत्काल वापस लेने की मांग की है।

गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ का संकट
NSUI के पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार के इस फैसले से हजारों गरीब परिवारों के सामने अपने बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा को लेकर भारी संकट खड़ा हो गया है। नर्सरी को आरटीई से बाहर करने का सीधा मतलब है कि अब गरीब बच्चों को या तो आंगनबाड़ी के भरोसे रहना होगा या फिर महंगे निजी स्कूलों की भारी-भरकम फीस भरनी होगी। यह निर्णय सीधे तौर पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित करने जैसा है।
शिक्षा के अधिकार का हनन: NSUI
ज्ञापन सौंपते समय कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को प्रखरता से रखते हुए कहा:
- अतिरिक्त आर्थिक भार: निजी स्कूलों में प्री-प्राइमरी की फीस सामान्य परिवारों की पहुंच से बाहर है, जिससे अभिभावकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
- भविष्य के साथ खिलवाड़: प्राथमिक शिक्षा की नींव ही प्री-प्राइमरी से शुरू होती है, ऐसे में गरीब बच्चों को इस दायरे से बाहर रखना उनके भविष्य के साथ अन्याय है।
उग्र आंदोलन की चेतावनी
NSUI ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सरकार इस निर्णय को वापस नहीं लेती है, तो संगठन पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। कार्यकर्ताओं का कहना है कि शिक्षा सबका अधिकार है और इसमें किसी भी प्रकार का भेदभाव स्वीकार नहीं किया जाएगा। विधायक देवेंद्र यादव ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए उचित मंच पर उठाने का आश्वासन दिया है।