रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोल घोटाला मामले में जांच एजेंसी EOW-ACB ने सोमवार को विशेष अदालत में करीब 9,500 पन्नों का पूरक चालान पेश किया। चालान में आरोपियों की कथित भूमिका, रकम के लेन-देन, अवैध वसूली की व्यवस्था और कथित तौर पर जुटाए गए डिजिटल साक्ष्यों का विस्तृत विवरण शामिल किया गया है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, मामले में कोयला कारोबारियों और परिवहनकर्ताओं से 25 रुपये प्रति टन की दर से कथित अवैध वसूली किए जाने के आरोपों की जांच की गई है। इसके अलावा लौह अयस्क पैलेट के परिवहन से भी 100 रुपये प्रति टन की कथित वसूली से जुड़े तथ्यों को पूरक चालान में शामिल किया गया है।
इन 12 लोगों के खिलाफ पेश हुआ चालान
विशेष अदालत में जिन आरोपियों के खिलाफ पूरक चालान पेश किया गया, उनमें कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल, भिलाई विधायक देवेंद्र सिंह यादव, विनोद तिवारी, रामप्रताप सिंह, चंद्रदेव राय, जय प्रकाश मौर्य, पीयूश कुमार साहू, जोगेंदर सिंह, अनुराग चौरसिया, दीपेश टांक, सुनील अग्रवाल और राहुल मिश्रा के नाम शामिल हैं।
इन धाराओं के तहत केस दर्ज
जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ IPC की धारा 120-B, 420, 384, 467, 468, 471 और 109 सहित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज है। सोमवार को आरोपियों की कोर्ट में उपस्थिति निर्धारित थी, हालांकि चालान पेश किए जाने के दौरान वे अदालत में मौजूद नहीं थे।
कोयले पर 25 रुपये प्रति टन की वसूली का आरोप
जांच एजेंसी का दावा है कि सूर्यकांत तिवारी ने तत्कालीन अधिकारियों और सहयोगियों के साथ मिलकर कोयला कारोबारियों एवं परिवहनकर्ताओं से प्रति टन 25 रुपये की कथित अवैध वसूली की व्यवस्था तैयार की थी। विवेचना में सामने आए तथ्यों के अनुसार, 15 जुलाई 2020 के आदेश के बाद ऑनलाइन ई-परमिट व्यवस्था में जिला खनिज अधिकारी का अनुमोदन अनिवार्य किया गया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि विभिन्न जिलों से वसूली गई रकम रायपुर लाई जाती थी और इसके बाद उसका हिसाब-किताब कर कथित तौर पर आगे वितरण किया जाता था।
पैलेट परिवहन में 100 रुपये प्रति टन लेवी का दावा
पूरक चालान में कोयले के अलावा लौह अयस्क पैलेट के परिवहन से जुड़ी कथित वसूली का भी उल्लेख किया गया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, पैलेट के सड़क और रेल परिवहन के लिए अभिवहन पास की व्यवस्था लागू होने के दौरान संबंधित उद्योगपतियों से 100 रुपये प्रति टन की रकम लिए जाने के तथ्य सामने आए हैं। एजेंसी का दावा है कि तत्कालीन संचालक, भौमिकी एवं खनिकर्म जयप्रकाश मौर्य ने पैलेट उद्योग से जुड़े लोगों की बैठक लेकर उन्हें कथित तौर पर यह रकम सूर्यकांत तिवारी या उसके सहयोगियों तक पहुंचाने के निर्देश दिए थे। जांच के दौरान जब्त डायरियों में भी पैलेट उद्योग से कथित वसूली से जुड़ी प्रविष्टियां मिलने की बात कही गई है।
डिजिटल रिकॉर्ड और ई-मेल भी जांच के दायरे में
EOW-ACB के मुताबिक, विवेचना के दौरान कई डिजिटल साक्ष्य और कंपनियों के बीच हुए पत्राचार को जब्त किया गया। जांच एजेंसी का दावा है कि सूर्यकांत तिवारी और उसके सहयोगी कथित वसूली की व्यवस्था को लागू कराने के लिए अलग-अलग जिलों में बैठकें करते थे। जांच में संबंधित जिलों के विश्राम गृहों में सीएम हाउस के नाम से बुकिंग कराए जाने से जुड़े साक्ष्य मिलने का भी उल्लेख किया गया है। इसके अलावा बालको कंपनी के ई-मेल और पत्राचार में कथित लेवी राशि को परिवहन बिलों में ‘इंसिडेंटल एक्सपेंसेस’ के तौर पर शामिल किए जाने की बात सामने आने का दावा किया गया है। अंबुजा कंपनी की ओर से खनिज विभाग को भेजे गए उस पत्राचार को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है, जिसमें आदेश जारी होने के बाद कोयला परिवहन के टीपी पास से संबंधित जानकारी थी।
पहले भी पेश हो चुके हैं चालान
कोल घोटाला प्रकरण में यह पहली बार नहीं है जब जांच एजेंसी ने अदालत में चालान पेश किया है। इससे पहले मामले में एक मुख्य चालान और पांच पूरक चालान पेश किए जा चुके हैं। अब करीब 9,500 पन्नों के इस पूरक चालान में जांच के दौरान सामने आए नए तथ्यों, कथित लेन-देन, वसूली और डिजिटल साक्ष्यों का विवरण अदालत के समक्ष रखा गया है।

