मंत्री ओपी चौधरी का बड़ा ऐलान : अब सिर्फ मकान नहीं बनाएगा हाउसिंग बोर्ड, सड़क-पुल और स्टेडियम तक बढ़ेगी भूमिका

रायपुर। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल यानी हाउसिंग बोर्ड की भूमिका अब केवल मकान बनाने तक सीमित नहीं रहेगी। प्रदेश सरकार इसे सड़क, पुल-पुलिया, खेल परिसर, सार्वजनिक भवन, टाउन प्लानिंग और शहरी पुनर्विकास जैसी बड़ी अधोसंरचना परियोजनाओं में भी सक्रिय रूप से शामिल करने की तैयारी कर रही है। वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने नवा रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण कार्यशाला में मंडल के भविष्य का रोडमैप सामने रखा।

मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में हाउसिंग बोर्ड को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर संस्था के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके लिए वित्तीय स्थिति सुधारने के साथ नई परियोजनाओं, आधुनिक तकनीक और नए वित्तीय मॉडल पर काम किया जा रहा है।

700 करोड़ की ऋण देनदारी खत्म, रिक्त संपत्तियों की बिक्री को मिली रफ्तार

ओपी चौधरी ने बताया कि हाउसिंग बोर्ड लंबे समय से वित्तीय दबाव से जूझ रहा था। करीब 700 करोड़ रुपए की लंबित ऋण देनदारी समाप्त किए जाने से मंडल को बड़ी राहत मिली है। इसके साथ ही लंबे समय से खाली पड़ी संपत्तियों को बेचने के लिए वन टाइम सेटलमेंट यानी OTS योजना लागू की गई, जिससे बिक्री में तेजी आई। मंत्री ने कहा कि हाउसिंग बोर्ड को बजट पर निर्भर संस्था के बजाय अपनी परियोजनाओं और संसाधनों से आय अर्जित करने वाली आर्थिक रूप से सक्षम संस्था बनना होगा।

मांग देखकर ही शुरू होंगी नई आवासीय परियोजनाएं

मंत्री ने पुरानी कार्यप्रणाली में बदलाव की जरूरत बताते हुए कहा कि भविष्य में बिना पर्याप्त मांग के आवासीय परियोजनाएं शुरू नहीं की जाएंगी। नई परियोजनाओं को वास्तविक बुकिंग और बाजार की जरूरत से जोड़ने की व्यवस्था की गई है। नई व्यवस्था के तहत शुरुआती तीन महीने में 30 प्रतिशत बुकिंग अथवा कुल 60 प्रतिशत बुकिंग की शर्त को निविदा प्रक्रिया से जोड़ा गया है। इससे बिना मांग वाली परियोजनाओं में पूंजी फंसने का जोखिम कम होगा।

सड़क, पुल और स्टेडियम भी बनाएगा हाउसिंग बोर्ड

हाउसिंग बोर्ड के पास मौजूद इंजीनियरिंग और तकनीकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल अब व्यापक स्तर पर करने की तैयारी है। मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि मंडल को सड़क, पुल-पुलिया, खेल परिसर, स्टेडियम और सार्वजनिक भवनों के निर्माण में भी विशेषज्ञ संस्था के रूप में अपनी पहचान बनानी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को दूसरे राज्यों की निविदाओं में भाग लेने और अगले दो वर्षों में छत्तीसगढ़ के बाहर भी परियोजनाएं हासिल करने का लक्ष्य रखने के लिए प्रेरित किया।

TPS और PPP मॉडल से विकास को मिलेगी नई रफ्तार

ओपी चौधरी ने कहा कि तेजी से बढ़ते राज्य में हर विकास कार्य के लिए केवल सरकारी बजट पर निर्भर रहना संभव नहीं है। इसलिए टाउन प्लानिंग स्कीम (TPS), पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) और पुनर्विकास मॉडल के जरिए परियोजनाओं को गति देने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि TPS के जरिए निजी भूमि का योजनाबद्ध विकास कर सड़क, पानी और दूसरी जरूरी सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं। इससे भूमि अधिग्रहण की मुश्किलें कम होंगी और व्यवस्थित शहरी विकास को बढ़ावा मिलेगा।

सेरीखेड़ी मॉडल में 94 एकड़ जमीन बचाने का दावा

मंत्री ने सेरीखेड़ी की टाउन प्लानिंग परियोजना का उदाहरण देते हुए बताया कि करीब 800 करोड़ रुपए की अधोसंरचना लागत वाली परियोजना को PPP मॉडल से आगे बढ़ाने की पहल की गई है। उनके मुताबिक शुरुआती गणना में परियोजना के लिए करीब 218 एकड़ जमीन की जरूरत आंकी गई थी, लेकिन प्रतिस्पर्धात्मक निविदा के बाद यह जरूरत घटकर लगभग 124 एकड़ रह गई। इस तरह करीब 94 एकड़ भूमि की बचत हुई।

सरकारी जमीन के पुनर्विकास से बनेंगी आधुनिक सुविधाएं

मंत्री ने शहरों में मौजूद महत्वपूर्ण सरकारी जमीन के बेहतर इस्तेमाल पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी जमीन के एक हिस्से का व्यावसायिक उपयोग कर उससे मिलने वाले संसाधनों के जरिए कलेक्ट्रेट भवन, सरकारी कार्यालय, पुस्तकालय, उद्यान, स्टेडियम और इंडोर खेल परिसर जैसी सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं।

खेल सुविधाओं के निर्माण के साथ रखरखाव पर भी जोर

ओपी चौधरी ने कहा कि केवल स्टेडियम या खेल परिसर बनाना पर्याप्त नहीं है। इनका बेहतर संचालन, रखरखाव और अधिकतम उपयोग भी सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों से होटल, परिवहन, पर्यटन और व्यापार जैसी आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलता है। नवा रायपुर में बैडमिंटन, तैराकी, स्क्वैश और क्रिकेट जैसी खेल विधाओं के लिए विशेषज्ञ संस्थाओं और खिलाड़ियों के सहयोग से प्रशिक्षण सुविधाएं विकसित करने की पहल का भी उन्होंने उल्लेख किया।

AI और आधुनिक तकनीक की ट्रेनिंग पर भी फोकस

नवा रायपुर में हुई तकनीकी कार्यशाला में अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन, संपदा प्रबंधन, निर्माण गुणवत्ता और आधुनिक तकनीक से जुड़े विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑनलाइन हाउसिंग मैनेजमेंट, टाउन प्लानिंग, वित्तीय जोखिम प्रबंधन, RCC संरचनाओं और आधुनिक मार्केटिंग जैसे विषय शामिल रहे।

हाउसिंग बोर्ड की आय बढ़ाने और नई परियोजनाओं पर जोर

मंडल अध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने कहा कि हाउसिंग बोर्ड का अधोसंरचना विकास मंडल के रूप में विस्तार केवल नाम बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि संस्था की कार्यशैली और जिम्मेदारियों में बदलाव का अवसर है। उन्होंने पिछले करीब 18 महीनों में संपत्ति बिक्री और राजस्व अर्जन में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए बताया कि लगभग 8 हजार संपत्तियों की बिक्री और 1,800 करोड़ रुपए के राजस्व अर्जन की दिशा में काम हुआ है। साथ ही 2 हजार करोड़ रुपए से अधिक की नई परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की जानकारी दी।

33 जिलों में आधुनिक टाउनशिप विकसित करने का लक्ष्य

अनुराग सिंह देव ने कहा कि मंडल का लक्ष्य सिर्फ मकान बनाकर बेच देना नहीं, बल्कि प्रदेश के सभी 33 जिलों में आधुनिक और व्यवस्थित टाउनशिप विकसित करना है। इनमें पार्क, बाजार, सामुदायिक सुविधाएं, पर्यावरण संरक्षण और ईवी चार्जिंग स्टेशन जैसी आधुनिक व्यवस्थाओं पर भी ध्यान दिया जाएगा।

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