छत्तीसगढ़ शराब घोटाला : 20 लोगों और 22 फर्म-कंपनियों के खिलाफ 27 हजार पन्नों का चालान, EOW-ACB का बड़ा दावा

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में EOW-ACB ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए विशेष न्यायालय में दसवां चालान पेश किया है। एजेंसी के मुताबिक, इस बार 20 व्यक्तियों के साथ 22 फर्मों और कंपनियों को आरोपी बनाया गया है। करीब 27 हजार पन्नों के दस्तावेजों के साथ यह चालान विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), रायपुर में पेश किया गया।

EOW-ACB का दावा है कि जांच में शराब के अवैध उत्पादन और बिक्री से लेकर कमीशन वसूली, फर्जी होलोग्राम, हवाला नेटवर्क और कथित अवैध कमाई को संपत्तियों तथा कंपनियों में निवेश करने तक के साक्ष्य जुटाए गए हैं। चालान में रामगोपाल अग्रवाल, यश टुटेजा और अख्तर ढेबर समेत 20 लोगों के नाम शामिल हैं। इसके अलावा छत्तीसगढ़ डिस्टिलरी लिमिटेड, वेलकम डिस्टिलरी प्राइवेट लिमिटेड, भाटिया वाइन्स मर्चेन्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, प्रिज्म होलोग्राफी एंड सिक्योरिटी फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड समेत कुल 22 फर्मों और कंपनियों के खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई की गई है।

15 जिलों में 60 लाख से ज्यादा पेटी पार्ट-B शराब बेचने का दावा

जांच एजेंसी के अनुसार, कथित सिंडिकेट ने आबकारी व्यवस्था का दुरुपयोग करते हुए देशी और विदेशी शराब की सप्लाई पर कमीशन वसूला। डिस्टिलरियों में आबकारी शुल्क दिए बिना अतिरिक्त देशी शराब तैयार कराने का भी आरोप है। इसे जांच में ‘पार्ट-B’ शराब बताया गया है। EOW-ACB ने चालान में दावा किया है कि चिह्नित 15 जिलों में पार्ट-B की करीब 60 लाख 50 हजार 950 पेटियां अवैध रूप से बेची गईं, जिसका सकल मूल्य लगभग 2,174.67 करोड़ रुपये आंका गया है। एजेंसी के मुताबिक, वैध देशी शराब की सप्लाई पर पार्ट-A कमीशन करीब 319.27 करोड़ और मार्केट शेयर व सप्लाई एरिया के नाम पर पार्ट-C कमीशन करीब 52 करोड़ रुपये था। विदेशी शराब से जुड़े विभिन्न मदों में करीब 281.89 करोड़ रुपये कमीशन और FL-10A लाइसेंसी कंपनियों का सकल लाभ लगभग 248.51 करोड़ रुपये बताया गया है। इन मदों को मिलाकर एजेंसी ने करीब 3,076.34 करोड़ रुपये का आकलन किया है।

डुप्लीकेट होलोग्राम और फर्जी परमिट का इस्तेमाल

चालान में आरोप लगाया गया है कि पार्ट-B शराब को सरकारी दुकानों तक पहुंचाने के लिए डुप्लीकेट होलोग्राम और फर्जी अथवा डुप्लीकेट परिवहन परमिट का इस्तेमाल किया जाता था। अतिरिक्त खाली बोतलों की आपूर्ति भी की गई।कथित तौर पर इस शराब की बिक्री सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं होती थी। बिक्री से मिलने वाली नकद रकम को नियमित गल्ले से अलग रखकर बाद में सिंडिकेट तक पहुंचाया जाता था। EOW-ACB के मुताबिक, शराब दुकानों के लिए कर्मचारी उपलब्ध कराने वाली कुछ मैनपावर एजेंसियों के संचालकों और प्रबंधकों की भूमिका भी जांच में सामने आई है। एजेंसी का आरोप है कि इनके अधीन कर्मचारियों के जरिए पार्ट-B शराब की बिक्री कराई जाती थी।

विदेशी शराब की सप्लाई में भी कमीशन का आरोप

जांच में FL-10A लाइसेंस वाली कंपनियों के जरिए विदेशी शराब की सप्लाई पर भी कमीशन लेने का दावा किया गया है। एजेंसी के मुताबिक, दिशिता वेंचर्स, ओम साई ब्रेवरेजेस और नेक्सजेन पावर इंजीटेक के जरिए निर्माता कंपनियों और CSMCL के बीच व्यवस्था बनाकर कथित तौर पर कमीशन लिया गया। EOW-ACB का कहना है कि जांच में फर्मों और कंपनियों के बैंक खातों, दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड के जरिए रकम के लेन-देन से जुड़े साक्ष्य जुटाए गए हैं।

हवाला से दुबई तक रकम पहुंचाने का दावा

चालान में कथित अवैध कमाई को हवाला और आंगड़िया नेटवर्क के जरिए देश के अलग-अलग शहरों तक पहुंचाने का भी जिक्र है। जांच एजेंसी का दावा है कि रकम दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और राजकोट समेत कई शहरों में पहुंचाई गई। हवाला नेटवर्क के जरिए दुबई में भी भुगतान उपलब्ध कराने के साक्ष्य मिलने की बात कही गई है।जांच में कथित नकद रकम के बदले बैंकिंग एंट्री लेकर उसे अनसिक्योर्ड लोन के रूप में दिखाने और बाद में जमीन, अचल संपत्तियों तथा कारोबार में निवेश करने के आरोप भी लगाए गए हैं।

रामगोपाल अग्रवाल पर ‘पार्टी फंड’ के नाम पर 1000 करोड़ लेने का आरोप

EOW-ACB ने चालान में रामगोपाल अग्रवाल की भूमिका को लेकर भी बड़ा दावा किया है। एजेंसी के अनुसार, जांच में ‘पार्टी फंड’ के नाम पर 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की नकद रकम प्राप्त करने, उसका हिसाब रखने और आगे पहुंचाने से जुड़े साक्ष्य मिले हैं। वहीं यश टुटेजा पर कथित अवैध रकम को पारिवारिक खातों और संपत्तियों से जोड़ने तथा जमीन की खरीद-बिक्री के जरिए उसके स्रोत को वैध दिखाने में भूमिका का आरोप लगाया गया है। अख्तर ढेबर के संबंध में एजेंसी का दावा है कि फर्मों और कंपनियों के खातों में रकम को अनसिक्योर्ड लोन के रूप में लेकर जमीन और अन्य अचल संपत्तियों में लगाया गया।

लॉकडाउन में भी शराब की अवैध बिक्री का आरोप

चालान में कोरोना लॉकडाउन के दौरान शराब के कथित अवैध कारोबार से जुड़े साक्ष्यों का भी उल्लेख किया गया है। EOW-ACB के मुताबिक, सिलतरा स्थित एन.व्ही. डिस्टिलरी का नियमित संचालन बंद रहने के दौरान वहां रखी शराब को कथित तौर पर निकालकर होटल और बार तक पहुंचाया गया।एजेंसी ने मई 2020 में प्लांट के नियमित प्रबंधन की जानकारी और अनुमति के बिना नया उत्पादन किए जाने से संबंधित विवरण मिलने का भी दावा किया है। इससे जुड़े गवाहों के बयान, उत्पादन रिकॉर्ड, परिवहन संबंधी दस्तावेज और चैट को चालान का हिस्सा बनाया गया है।

दो आरोपियों के खिलाफ फरारी में चालान

मामले में रामगोपाल अग्रवाल फिलहाल न्यायिक अभिरक्षा में हैं। वहीं बी.आर. लोहिया और कुमार भाई ठक्कर उर्फ खंजन ठक्कर के खिलाफ फरारी में चालान पेश किया गया है। EOW-ACB के मुताबिक, बी.आर. लोहिया विदेश में रह रहे हैं और उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी कराया गया है। एजेंसी ने कहा है कि इंटरपोल के सहयोग से आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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