रायपुर। ‘वोट चोरी’ और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सियासी घमासान के बीच भाजपा सांसद एवं प्रदेश मुख्य प्रवक्ता संतोष पाण्डेय ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और विपक्षी दल चुनाव व्यवस्था को लेकर जनता के बीच भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। पाण्डेय के मुताबिक, चुनाव आयोग पर सवाल उठाने के पीछे विपक्ष का मकसद केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के कामकाज से लोगों का ध्यान भटकाना है।
भाजपा कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में पाण्डेय ने कांग्रेस के चुनावी इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि जिस पार्टी की ओर से आज चुनाव प्रक्रिया और ‘वोट चोरी’ को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उसके अपने राजनीतिक इतिहास में भी कई ऐसे घटनाक्रम रहे हैं, जिन पर सवाल उठते रहे हैं।
आंबेडकर से लेकर जम्मू-कश्मीर चुनाव तक का किया जिक्र
संतोष पाण्डेय ने 1952 से लेकर 1987 तक के अलग-अलग चुनावों और राजनीतिक घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि 1952 के चुनाव में कांग्रेस ने कम्युनिस्टों के साथ मिलकर डॉ. भीमराव आंबेडकर के खिलाफ राजनीतिक रणनीति अपनाई थी। इसके बाद उन्होंने 1957 में बिहार के बेगूसराय में कथित बूथ कब्जे, 1967 के जम्मू-कश्मीर चुनाव में विपक्षी उम्मीदवारों को चुनाव से रोकने और 1987 के जम्मू-कश्मीर चुनाव में कथित धांधली का जिक्र किया। 1975 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को भी उन्होंने अपने तर्क का हिस्सा बनाया। पाण्डेय ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग से जुड़ा फैसला आया था। भाजपा सांसद ने कांग्रेस पर अपने राजनीतिक हितों के लिए देश में निर्वाचित सरकारों को बर्खास्त करने का आरोप भी लगाया।
कांग्रेस के वोट शेयर में गिरावट को बनाया निशाना
श्री पाण्डेय ने कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 1952 में पार्टी का वोट शेयर करीब 45 प्रतिशत था, जो 2024 के लोकसभा चुनाव में घटकर 21.4 प्रतिशत रह गया। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार जनसमर्थन कम होने के बाद कांग्रेस के पास अब कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वह EVM और ‘वोट चोरी’ जैसे मुद्दों को लेकर राजनीति कर रही है। उन्होंने राहुल गांधी के विदेश दौरे के दौरान निर्वाचन आयोग को लेकर दिए गए बयानों की भी आलोचना की और कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर इस तरह सवाल उठाने से लोकतांत्रिक व्यवस्था पर लोगों का भरोसा प्रभावित होता है।
SIR को लेकर भी कांग्रेस पर दोहरे रवैये का आरोप
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR पर पाण्डेय ने कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण कोई नई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने दावा किया कि आजादी के बाद अलग-अलग समय पर मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण और शुद्धिकरण की प्रक्रिया कई बार हो चुकी है। उन्होंने इस मुद्दे पर केरल के कांग्रेस नेताओं रमेश चेन्निथला और मैथ्यू कुझलनादन के बयानों का उल्लेख किया। साथ ही कांग्रेस सांसद शशि थरूर के SIR को लेकर रुख का भी हवाला देते हुए पाण्डेय ने कांग्रेस पर राजनीतिक सुविधा के अनुसार अलग-अलग बातें कहने का आरोप लगाया।
कैसे होती है मतदाता सूची की प्रक्रिया?
भाजपा सांसद ने बताया कि मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 324 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के प्रावधानों के तहत संचालित होती है। उनके अनुसार SIR के दौरान बूथ लेवल अधिकारी यानी BLO मतदाताओं से संपर्क करते हैं और जरूरी जानकारी व दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी कराते हैं। पाण्डेय के मुताबिक, इस दौरान मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थित या एक से अधिक स्थानों पर दर्ज मतदाताओं की पहचान की जाती है। इसके बाद प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित कर दावे और आपत्तियां आमंत्रित की जाती हैं। इन पर सुनवाई और जांच के बाद अंतिम मतदाता सूची तैयार की जाती है।

