रायपुर। धान खरीदी का सीजन शुरू होने से पहले छत्तीसगढ़ में किसानों का आंदोलन तेज होता नजर आ रहा है। मंगलवार 27 अक्टूबर को भारतीय किसान संघ के बैनर तले प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से किसान रायपुर पहुंचे और माना स्थित धरना स्थल पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद किसानों ने मंत्रालय यानी महानदी भवन का घेराव करने के लिए कूच किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया।
मंत्रालय तक नहीं पहुंच पाने के बाद किसानों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और प्रदर्शन समाप्त किया। किसान संगठन ने साफ चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और बड़ा करते हुए विधानसभा का घेराव किया जाएगा।
3358 रुपए में धान खरीदी की मांग
किसानों की प्रमुख मांग इस बार धान का समर्थन मूल्य 3358 रुपए प्रति क्विंटल तय करने की है। किसानों का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है और मौजूदा दर पर उपज बेचने से उन्हें पर्याप्त लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसके साथ ही किसानों ने वर्ष 2022-23 की धान खरीदी से जुड़ी करीब 1700 करोड़ रुपए की बकाया अंतर राशि का भुगतान करने की मांग भी उठाई है।
चौथी किस्त से लेकर बिजली तक कई मांगें
प्रदर्शन कर रहे किसानों ने राजीव गांधी किसान न्याय योजना की लंबित चौथी किस्त जारी करने की मांग रखी। इसके अलावा धान खरीदी का समय 15 नवंबर से बढ़ाकर 15 फरवरी तक करने की मांग भी की गई। किसानों ने खरीदी केंद्रों पर तौल व्यवस्था को स्पष्ट करने, हाफ बिजली बिल योजना को दोबारा लागू करने और कृषि पंपों को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने की मांग रखी। वहीं गन्ने का भाव 500 रुपए प्रति क्विंटल किए जाने की मांग भी आंदोलन में उठाई गई।
पुलिस ने रास्ते में रोका, आगे आंदोलन की चेतावनी
किसानों के मंत्रालय घेराव के ऐलान को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने उन्हें महानदी भवन की ओर बढ़ने से पहले ही रोक दिया। इसके बाद किसानों ने अपना ज्ञापन सौंपा और प्रदर्शन समाप्त किया। किसान नेताओं ने कहा कि धान खरीदी शुरू होने से पहले सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं हुआ, तो किसान दोबारा सड़कों पर उतरेंगे और विधानसभा घेराव किया जाएगा।

