भिलाई। भिलाई में आयोजित 26वें वसुंधरा सम्मान एवं वैचारिक संगोष्ठी समारोह में वरिष्ठ पत्रकार राजेश गनोदवाले को वसुंधरा सम्मान से सम्मानित किया गया। छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने उन्हें शाल, श्रीफल, प्रशस्ति पत्र एवं सम्मान निधि प्रदान की। स्वर्गीय देवीप्रसाद चौबे की 50वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित समारोह में भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति, इतिहास और पत्रकारिता जैसे विषयों पर गंभीर विमर्श हुआ।
समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. रमन सिंह ने कहा कि भिलाई में पिछले 26 वर्षों से आयोजित हो रहा वसुंधरा सम्मान एवं वैचारिक संगोष्ठी अपनी गुणवत्ता और गंभीरता के कारण सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश में जाना जाता है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन के प्रति प्रदेश के प्रबुद्ध वर्ग में विशेष आकर्षण है और यहां सकारात्मक एवं विचारवान पत्रकारिता के प्रति समाज की गहरी प्रतिबद्धता दिखाई देती है।

डॉ. रमन सिंह ने कहा कि राजेश गनोदवाले का सम्मान केवल एक समर्पित पत्रकार का सम्मान नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की गौरवशाली लोकधर्मी पत्रकारिता का सम्मान है। उन्होंने स्वर्गीय देवीप्रसाद चौबे को याद करते हुए कहा कि वे कर्मयोगी व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने अपने दौर में ग्रामीण पत्रकारिता के माध्यम से किसानों और खेतिहर मजदूरों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया।
भारतीय ज्ञान परंपरा पर हुआ विमर्श
समारोह में भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति, इतिहास और पत्रकारिता विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। मुख्य वक्ता छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा अत्यंत विस्तृत और बहुआयामी है। इसका सीधा संबंध भारतीय संस्कृति की आदि परंपरा से है, जो पुरातन होने के साथ-साथ अद्यतन भी है।
उन्होंने कहा कि संस्कृति, इतिहास और पत्रकारिता के संदर्भ में भारतीय ज्ञान परंपरा की व्याख्या करना चुनौतीपूर्ण होने के साथ-साथ बेहद जरूरी भी है।
डॉ. चरणदास महंत ने पत्रकारिता की चुनौतियों पर रखी बात
समारोह की अध्यक्षता करते हुए विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि स्वर्गीय देवीप्रसाद चौबे की स्मृति में वसुंधरा एवं श्री चतुर्भुज मेमोरियल फाउंडेशन का आयोजन प्रदेश का अनूठा आयोजन है। इस आयोजन के प्रति राज्य के बौद्धिक वर्ग में सम्मान और आत्मीयता का भाव है।
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के माध्यम से लोक जागरण का कार्य जरूरी होने के साथ चुनौतीपूर्ण भी है। आज पत्रकारिता कई तरह की चुनौतियों से गुजर रही है और इसकी अलग-अलग शाखाएं विकसित हो चुकी हैं। ऐसे में आपसी सामंजस्य के साथ जनसमस्याओं पर काम करना पत्रकारों की बड़ी जिम्मेदारी है। डॉ. महंत ने स्वर्गीय देवीप्रसाद चौबे को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें सरल, सहज और आदर्शवादी व्यक्तित्व का धनी बताया।
सम्मान ग्रहण कर बोले राजेश गनोदवाले
वसुंधरा सम्मान प्राप्त करने के बाद राजेश गनोदवाले ने कहा कि वसुंधरा सम्मान राज्य का प्रतिष्ठित सम्मान है और इसकी अपनी गरिमा है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता और लेखन उनके लिए हमेशा जीवन के जरूरी काम की तरह रहे हैं। इसके प्रति दायित्व उनके लिए किसी अपेक्षा या महत्वाकांक्षा से अधिक महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता और लेखन में दायित्वबोध का होना बेहद आवश्यक है।
अतिथि वक्ता सतीश जायसवाल ने कहा कि वे कई वर्षों से वसुंधरा सम्मान समारोह और वैचारिक संगोष्ठी के साक्षी रहे हैं। इस आयोजन ने विचार-विमर्श की जो स्वस्थ परंपरा विकसित की है, वह प्रदेश की बौद्धिक परंपरा का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। उन्होंने राजेश गनोदवाले को राज्य की सांस्कृतिक पत्रकारिता को ईमानदारी और गंभीरता से सामने रखने वाला पत्रकार बताया।
वसुंधरा और बहुमत विशेषांक का लोकार्पण
समारोह में स्वर्गीय तीजन बाई के कला कर्म को समर्पित वसुंधरा विशेषांक तथा छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को समर्पित बहुमत विशेषांक का भी लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में लोक गायिका रजनी रजक ने छत्तीसगढ़ का राज्य गीत प्रस्तुत किया।
समारोह में विधायक रिकेश सेन सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। इनमें प्रदीप चौबे, रविंद्र चौबे, सतीश जायसवाल, दिवाकर मुक्तिबोध, सीमा श्रीवास्तव, अविनाश चौबे, ईवी मुरली, नरेंद्र बंछोर, डॉ. संजय तिवारी, आई.पी. मिश्रा, शंकर चरण पांडेय, मुमताज, जसवीर कौर, लतिका ताम्रकार, लोकबाबू, संजय कुमार मिश्र और मयंक चतुर्वेदी सहित अनेक लोग शामिल रहे।
कार्यक्रम का आयोजकीय वक्तव्य वसुंधरा सम्मान के संयोजक विनोद मिश्र ने दिया। संचालन डॉ. विश्वेश ठाकरे ने किया, जबकि आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव ने आभार प्रदर्शन किया। प्रशस्ति पत्र का वाचन श्वेता ने किया।