रायपुर | 17 मार्च 2026 छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा) के डॉक्टरों ने चिकित्सा जगत में एक अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने 11 साल के एक बच्चे के हृदय के पास स्थित अत्यंत दुर्लभ और जटिल स्टेज-3 इनवेसिव थायमिक कैंसर (टाइप-बी थायमोमा) का सफल ऑपरेशन कर नया विश्व कीर्तिमान स्थापित किया है।

दुनिया का सबसे कम उम्र का मरीज
मेडिकल जर्नल्स के आंकड़ों के अनुसार, अब तक इस तरह के कैंसर का सबसे कम उम्र का मरीज 12 वर्ष का दर्ज था, लेकिन छत्तीसगढ़ के इस 11 वर्षीय बच्चे ने इस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। सामान्यतः यह ट्यूमर 40 से 60 वर्ष की आयु के लोगों में पाया जाता है, बच्चों में इसका मिलना ‘रेयर ऑफ द रेयरेस्ट’ माना जाता है।
क्यों था यह ऑपरेशन ‘असंभव’?
विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू के नेतृत्व में हुई यह सर्जरी अत्यंत चुनौतीपूर्ण थी क्योंकि:
- अंगों से चिपका ट्यूमर: 400 ग्राम वजनी (12×8 सेमी) यह ट्यूमर बच्चे के हृदय, महाधमनी (एओर्टा), मुख्य पल्मोनरी आर्टरी और फेफड़ों से बुरी तरह चिपका हुआ था।
- जटिल तकनीक: इसे निकालने के लिए ‘ड्यूल एप्रोच’ (स्टर्नोटॉमी और थोरेक्टोमी) का उपयोग किया गया, यानी छाती की हड्डी और पसली दोनों तरफ चीरा लगाया गया।
- जोखिम: कई बड़े अस्पतालों ने ऑपरेशन से मना कर दिया था, लेकिन मेकाहारा की टीम ने हार्ट-लंग मशीन की मदद से इस असंभव कार्य को संभव बनाया।
4 घंटे चली मैराथन सर्जरी
लगभग 4 घंटे चले इस ऑपरेशन में ट्यूमर के साथ-साथ हृदय की झिल्ली और फेफड़े के कुछ प्रभावित हिस्सों को भी निकालना पड़ा। सर्जरी के बाद कैंसर विभाग द्वारा बच्चे को 25 साइकिल रेडिएशन थेरेपी दी गई।

अब स्कूल जा रहा है ‘नन्हा फाइटर’
ऑपरेशन के 6 महीने बाद बच्चा अब पूरी तरह स्वस्थ है। चांपा निवासी इस छात्र ने न केवल बीमारी को मात दी, बल्कि इस साल कक्षा छठवीं की परीक्षा भी दी है। इस सफलता को राष्ट्रीय कैंसर सर्जरी सम्मेलन में ‘बेस्ट पेपर अवार्ड’ से नवाजा गया है और अब इसे अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल में प्रकाशित करने की तैयारी है।
स्वास्थ्य मंत्री और डीन ने दी बधाई
प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस ऐतिहासिक सफलता के लिए पूरी मेडिकल टीम को बधाई दी है। पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी और अस्पताल अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने कहा कि यह उपलब्धि साबित करती है कि अब छत्तीसगढ़ के मरीजों को जटिल ऑपरेशनों के लिए महानगरों की ओर भागने की जरूरत नहीं है।

