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नकवी और आरपी सिंह का इस्तीफा: स्मृति ईरानी को मिला अल्पसंख्यक कल्याण का जिम्मा, ज्योतिरादित्य सिंधिया को इस्पात मंत्रालय

नकवी और आरपी सिंह का इस्तीफा: स्मृति ईरानी को मिला अल्पसंख्यक कल्याण का जिम्मा, ज्योतिरादित्य सिंधिया को इस्पात मंत्रालय

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिपरिषद से मुख्तार अब्बास नकवी (Mukhtar Abbas Naqvi) और रामचंद्र प्रसाद सिंह (RP Singh) के इस्तीफे के बाद अब उनकी जगह पर दो मंत्रियों को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है.

ज्योतिरादित्य सिंधिया को उनके मौजूदा पोर्टफोलियो के अलावा, इस्पात मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया है जबकि स्मृति ईरानी को उनके मौजूदा पोर्टफोलियो के अलावा अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया है. बता दें कि प्रधानमंत्र नरेंद्र मोदी की सलाह के बाद केंद्रीय मंत्रिपरिषद से मुख्तार अब्बास नकवी और राम चंद्र प्रसाद सिंह ने इस्तीफा दे दिया था, जिसे राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया है.

बता दें कि केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी और राम चंद्र प्रसाद सिंह ने राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त होने के एक दिन पहले बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया. प्रधानमंत्री मोदी ने इससे पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान देश व लोगों की सेवा के लिए दोनों नेताओं की सराहना की थी.

प्रधानमंत्री की सराहना को इस संकेत के रूप में देखा गया कि आज हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक दोनों नेताओं के लिए आखिरी थी. दोनों नेताओं का राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्यकाल सात जुलाई यानी बृहस्पतिवार को समाप्त हो रहा है.

मुख्तार अब्बास नकवी और रामचंद्र प्रसाद सिंह का इस्तीफा स्वीकार
नकवी को भाजपा ने पिछले दिनों हुए राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव में कहीं से उम्मीदवार नहीं बनाया था. आरसीपी सिंह जनता दल यूनाइटेड के कोटे से केंद्र सरकार में मंत्री थे.

उन्हें भी जदयू ने अगला कार्यकाल नहीं दिया है. सिंह के पास इस्पात मंत्रालय का प्रभार था. वहीं नकवी केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री थे. वह राज्यसभा में भाजपा के उपनेता हैं. ऐसा माना जा रहा है कि पार्टी उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है.

1998 में रामपुर लोकसभा सीट से दर्ज की थी जीत
केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी प्रयागराज के रहने वाले हैं. हालांकि उन्होंने अपना राजनीतिक कर्मक्षेत्र रामपुर को बनाया है. रामपुर प्रदेश की एकलौती ऐसी लौकसभा सीट है जहां पर मुस्लिम वोटरों की संख्या 50 प्रतिशत से भी अधिक है. इस सीट पर नकवी हमेशा से ही सक्रिय रहते हैं. इस हॉट सीट से नकवी साल 1998 में लोकसभा का चुनाव भी जीत चुके हैं, हालांकि इसके बाद उन्हें दो बार के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा.


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