सड़क हादसों पर हाईकोर्ट सख्त, राज्य सरकार और NHAI से मांगा जवाब, 2025 में 6,967 लोगों की गई थी जान

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों और मौतों को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। सड़क सुरक्षा के इंतजामों को लेकर कोर्ट ने राज्य सरकार, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और संबंधित विभागों से शपथ पत्र के साथ जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में चल रही है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट कमिश्नर अधिवक्ता रवींद्र शर्मा और अपूर्व त्रिपाठी ने प्रदेश के विभिन्न जिलों से जुटाए गए अधिकृत आंकड़े अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। आंकड़ों के आधार पर बताया गया कि सड़क सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों की गंभीरता में कमी है और नियमों के तहत नियमित रूप से आयोजित की जाने वाली सड़क सुरक्षा समिति की बैठकें भी कई जिलों में नहीं हो रही हैं।

2025 में 15 हजार से ज्यादा सड़क हादसे, करीब 7 हजार मौतें

कोर्ट में पेश आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में छत्तीसगढ़ में कुल 15,484 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इन हादसों में 6,967 लोगों की मौत हुई, जबकि 13,156 लोग घायल हुए। वहीं, वर्ष 2026 में 31 मई तक महज पांच महीनों में 6,891 सड़क हादसे सामने आए, जिनमें 3,170 लोगों की जान चली गई।

सरगुजा जिले में भी सड़क हादसों की स्थिति बेहद चिंताजनक बताई गई। यहां एक साल के भीतर सड़क दुर्घटनाओं में 300 से अधिक लोगों की मौत हुई। इसके बावजूद कलेक्टर की अध्यक्षता में 1 जनवरी 2025 से 31 दिसंबर 2025 तक पूरे साल में सड़क सुरक्षा समिति की केवल एक बैठक आयोजित की गई। कांकेर जिले में भी वर्षभर में महज एक बैठक होने की जानकारी अदालत के सामने रखी गई।

सड़कों पर मवेशियों को लेकर चीफ जस्टिस ने जताई नाराजगी

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने बारिश के मौसम में नेशनल हाईवे और प्रमुख सड़कों पर बैठे मवेशियों को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दिन के समय वाहन चालक किसी तरह मवेशियों से बच निकलते हैं, लेकिन रात के वक्त सड़क पर बैठे मवेशियों के कारण दुर्घटना का खतरा काफी बढ़ जाता है।

पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए चीफ जस्टिस ने पूछा कि “क्या पुलिसकर्मियों का काम सिर्फ मवेशी हांकना है या व्यवस्था बनाना?”

प्रदेश के 10 सबसे खतरनाक ब्लैक स्पॉट की सूची पेश

कोर्ट में प्रदेश के 10 सबसे खतरनाक ब्लैक स्पॉट की सूची भी पेश की गई। इनमें से सात ब्लैक स्पॉट रायपुर जिले में बताए गए हैं। धरसींवा क्षेत्र में सिलतरा से निको गेट के बीच एक साल में सड़क हादसों में 19 लोगों की मौत हुई। वहीं, कोरबा के पाली-गझरा नाला मार्ग पर 22 सड़क हादसों में 17 लोगों की जान चली गई। रायपुर के तेलीबांधा, नेवरा, आरंग और खरोरा क्षेत्र भी गंभीर दुर्घटना स्थलों में शामिल हैं।

ट्रकों की अवैध पार्किंग और ओवरलोडिंग पर भी कोर्ट सख्त

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने औद्योगिक क्षेत्रों और नेशनल हाईवे पर ट्रकों की अवैध पार्किंग को सड़क हादसों की बड़ी वजह बताया। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि 10 टन क्षमता वाले वाहनों में कथित तौर पर 22 से 25 टन तक माल ढोया जा रहा है। वहीं, वाहनों का वजन जांचने के लिए लगाई गई कई मशीनों के बंद होने की बात भी सामने आई।

हाई कोर्ट ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार और संबंधित विभागों से जवाब तलब करते हुए शपथ पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई में सरकार और संबंधित एजेंसियों के जवाब के बाद सड़क हादसों की रोकथाम के लिए आगे की कार्रवाई पर तस्वीर साफ हो सकती है।

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