लोकआस्था और बदलते बस्तर की गूंज: ‘तोर मया ला कइसे बरनव’ और ‘बोलत हावे ना’ ने जीता श्रोताओं का दिल, देखिये Video

रायपुर/छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ की माटी की सोंधी महक और यहाँ की गहरी लोक संवेदनाएं एक बार फिर संगीत के माध्यम से जन-जन तक पहुँच रही हैं। इन दिनों दो विशेष गीत— “तोर मया ला कइसे बरनव वो, दाई अंगार मोती” और “बोलत हावे ना” सोशल मीडिया से लेकर लोगों की जुबान तक छाए हुए हैं। ये गीत न केवल मनोरंजन कर रहे हैं, बल्कि छत्तीसगढ़ के बदलते सामाजिक परिवेश और अटूट श्रद्धा को भी स्वर दे रहे हैं।

अंगार मोती मैया की ममता की पुकार

छत्तीसगढ़ी संस्कृति में देवी-देवताओं के प्रति अटूट विश्वास जीवन का आधार है। भक्ति गीत “तोर मया ला कइसे बरनव वो, दाई अंगार मोती” में इसी श्रद्धा को बेहद सरलता और आत्मीयता के साथ पिरोया गया है। खेत-खलिहान से लेकर गांव की गलियों तक, अपनी मुश्किलों और खुशियों को मां के चरणों में समर्पित करने की जो परंपरा है, वह इस गीत की पंक्तियों में जीवंत हो उठी है। श्रोता इसे अपनी जड़ों से जुड़ाव महसूस कर विशेष सराहना दे रहे हैं।

बस्तर में लौटती शांति का प्रतीक: ‘बोलत हावे ना’

वहीं दूसरी ओर, बस्तर के बदलते हालातों और वहां लौट आए सुकून पर आधारित गीत “बोलत हावे ना” तेजी से वायरल हो रहा है। इस गीत के माध्यम से एक बेहद मार्मिक संदेश दिया गया है— नक्सलवाद के काले साये की समाप्ति के बाद अब बस्तर की वह मैना जो कभी खामोश हो गई थी, फिर से चहकने लगी है। यह गीत केवल संगीत नहीं, बल्कि बस्तर में आए सकारात्मक बदलाव और वहां के जनजीवन में लौटती मुस्कान का प्रतीक बन गया है।

भाव और भाषा की मिठास

इन दोनों गीतों की सबसे बड़ी खूबी इनकी लोकभाषा की मिठास और भावों की सादगी है। बिना किसी दिखावे के, सीधे हृदय से निकली ये अनुभूतियां सुनने वालों को अपने गांव और अपनी माटी की याद दिलाती हैं। डिजिटल युग में जहाँ क्षेत्रीय भाषाएं संघर्ष कर रही हैं, वहां ये रचनाएं छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति को एक नई और आधुनिक पहचान दे रही हैं।

पत्रकार केवल कृष्ण की कलम का जादू

इन प्रभावशाली रचनाओं के पीछे छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार केवल कृष्ण की लेखनी है। अपनी पत्रकारिता के साथ-साथ साहित्य और कला के क्षेत्र में सक्रिय केवल कृष्ण इससे पहले अपने छत्तीसगढ़ी उपन्यास ‘बघवा’ के लिए काफी सुर्खियां बटोर चुके हैं। उनकी यह नई संगीतबद्ध रचनाएं सामूहिक लोकभावना की एक सशक्त अभिव्यक्ति बनकर उभरी हैं।


सोशल मीडिया पर वायरल

इन गीतों ने यूट्यूब और इंस्टाग्राम रील्स पर भी अपनी खास जगह बना ली है। युवा पीढ़ी इन गीतों के माध्यम से छत्तीसगढ़ी संस्कृति और बस्तर की नई पहचान को गर्व के साथ साझा कर रही है।

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