राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रतनपुर में माँ महामाया देवी के किये दर्शन, GGU के कन्वोकेशन में शामिल हुई महामहिम… काफिला रुकवाकर स्टूडेंट्स को चॉकलेट भी बांटी

बिलासपुर। देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु दो दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर है। दौरे के दूसरे दिन महामहिम बिलासपुर के रतनपुर में स्थित ऐतिहासिक एवं धार्मिक नगरी रतनपुर स्थित आदिशक्ति माँ महामाया देवी मंदिर पहुँची। यहाँ उन्होंने विधिवत पूजा- अर्चना कर देशवासियों की सुख-समृद्धि और प्रगति की कामना की। पहली बार रतनपुर स्थित महामाया देवी के मंदिर में राष्ट्रपति प्रवास हुआ है। इस अवसर पर माँ महामाया देवी का राजसी श्रृंगार किया गया। इस अवसर पर राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एवं केंद्रीय जनजाति विकास राज्यमंत्री रेणुका सिंह भी मौजूद रहीं। इसके साथ ही प्रेजिडेंट द्रौपदी मुर्मू गुरु घासीदार सेंट्रल यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में भी शामिल हुई। बिलासपुर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्टूडेंट्स को देखकर बीच सड़क अपना काफिला रुकवाकर बच्चों को चॉकलेट बांटी। उसके बाद उन्होंने कुछ देर तक उनसे बात की फिर चली गईं। वे रतनपुर महामाया मंदिर दर्शन करने जा रही थी। राष्ट्रपति ने काफिला रुकवाकर बच्चों को चॉकलेट भी बांटी।

समारोह में राज्यपाल और मुख्यमंत्री भी मौजूद रहे। इस दौरान राष्ट्रपति ने 28 ‎शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि और 76 स्टूडेंट्स को गोल्ड मेडल दिए। गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी के 10वें दीक्षांत समारोह में साढ़े तीन घंटे बिताने के बाद वह रायपुर के लिए रवाना हो गईं। उनकी सुरक्षा के लिए चप्पे-चप्पे पर अफसर और जवानों को तैनात किया गया था। बिलासपुर पहुंचने पर पं. सुंदरलाल शर्मा ओपन यूनिवर्सिटी स्थित हेलीपैड पर राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और केंद्रीय राज्य मंत्री रेणुका सिंह ने उनका स्वागत किया था। राष्ट्रपति के दौरे को लेकर शहर में कुछ स्थानों पर वाहनों का प्रवेश पूरी तरह बंद किया गया था। बिलासपुर-रतनपुर मार्ग को छह घंटे तक बंद रहा।

11वीं शताब्दी में बना था मंदिर
उल्लेखनीय है कि ऐतिहासिक एवं धार्मिक नगरी रतनपुर का गौरवशाली इतिहास रहा है। कलचुरी वंश के शासक रत्नदेव प्रथम ने रतनपुर को अपनी राजधानी बनाया और यहाँ आदिशक्ति माँ महामाया देवी मंदिर का निर्माण कराया। यह मंदिर 11वीं शताब्दी में बनवाया गया था। माँ महामाया रतनपुर शाखा के कलचुरी वंश के राजाओं की कुलदेवी थी। यहाँ पर दोनों नवरात्रियों में भव्य मेले का आयोजन होता है, जहां प्रदेश के हर जिले से लोग आते हैं और माँ महामाया के दर्शन कर उनके समक्ष मनोकामनाएं रखते हैं।

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