राजनांदगांव पुलिस का जागरूकता कार्यक्रम : लोगों को नए कानूनों की दी जानकारी, अब डिजिटल सबूतों से पुलिस इंवेस्टिगेशन में आएगी तेजी, पीड़ितों को जल्द मिलेगा न्याय

राजनांदगांव. देश में एक जुलाई से तीन नए कानून लागू हो गए हैं. राजनांदगांव पुलिस ने सभी थाना और चौकी में कार्यक्रम आयोजित कर तीन नए आपराधिक कानून के संबंध में लोगों को जागरूक किया. नए कानून भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 के क्रियान्वयन के लिए पुलिस की भूमिका एवं जनप्रतिनिधियों की भूमिका के बारे में लोगों को बताया गया.

पुलिस अधीक्षक मोहित गर्ग के निर्देशन पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ऑप्स) मुकेश ठाकुर एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राहुल देव शर्मा के मार्गदशन में जिले के सभी थाना/चौकी में जागरूकता अभियान चलाया गया. कार्यक्रम में नए कानूनों के माध्यम से नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और अपराधों की रोकथाम में महत्वपूर्ण सुधार, साइबर अपराध, डेटा सुरक्षा और तकनीकी धोखाधड़ी जैसे नए प्रकार के अपराध के सम्बन्ध में विस्तारपूर्वक बताया गया. साथ ही बताया गया कि इन नई संहिताओं को आधुनिक समय की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इससे न्यायिक प्रक्रिया में स्पष्टता और निष्पक्षता आती है। यह संहिता नागरिकों को सरकारी तंत्र के किसी भी दुरुपयोग से बचाने के लिए कानूनी संरक्षण प्रदान करती है।

कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य नागरिकों को बताया गया कि नागरिकों की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए पहली बार जीरो एफआईआर की शुरुआत होगी। अपराध कहीं भी हुआ हो उसे अपने थाना क्षेत्र के बाहर भी रजिस्टर किया जा सकेगा। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन और प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिसमें मौजूदा कानूनी ढांचे को अधिक संक्षिप्त और सरल बनाने के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे आम नागरिक इसे आसानी से समझ सकें। जांच प्रक्रियाओं और न्यायिक कार्यवाही में आधुनिक तकनीकी उपकरणों और डिजिटल सबूतों के उपयोग को बढ़ावा दिया गया है। साथ ही आरोपी और पीड़ित दोनों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई प्रावधान शामिल किए गए हैं।

कार्यक्रम में नवीन आपराधिक कानूनों में जोड़े गए नई धाराओं, पुराने कानून से हटाई गई धाराओ एवं आवश्यक परिवर्तनो की विस्तृत रूप से जानकारी दी गई। साथ ही यह भी बताया गया कि भारतीय न्याय संहिता 2023 ने भारतीय दंड संहिता 1860 को प्रतिस्थापित किया है, जिसमें 358 धाराओं को शामिल किया गया है। न्यायालय द्वारा बाधित धाराओं को समाप्त किया गया है और विभिन्न अपराधों के लिए दंड बढ़ाया गया है। जनप्रतिनिधियों से भी आग्रह किया गया कि तीनों कानून के संबंध में लोगों को बताएं एवं शांति व सौहाद्र बनाए रखने की अपील की गई।

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