जंबूरी में भ्रष्टाचार के संबंध में PCC महामंत्री की याचिका CGM कोर्ट में हुई स्वीकार, सुबोध ने कहा – न्यायालय पर पूर्ण विश्वास, दोषियों पर होगी कार्रवाई

रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश महामंत्री ने सक्षम विशेष न्यायालय एसीबी/ईओडब्ल्यू के समक्ष जंबूरी 2026 में हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए याचिका दायर की है, जिसे न्यायालय ने स्वीकार करते हुए 20 जनवरी 2026 को सुनवाई के लिए मौका दिया है।

पीसीसी महामंत्री सुबोध हरितवाल ने कहा कि हमें न्यायालय पर संपूर्ण विश्वास है और उम्मीद है कि जल्द ही दोषियों पर कार्रवाई होगी और भ्रष्टाचार करने वाले सभी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

सुबोध हरितवाल ने बताया कि याचिका में मंत्री गजेंद्र यादव, शामिल व्यापारी, अधिकारी के खिलाफ याचिका दायर की गई है। सुबोध ने कहा कि छत्तीसगढ़ में जेम पोर्टल से होने वाली सरकारी निविदाओं की पारदर्शिता एक बार फिर कठघरे में है। सवाल यह नहीं है कि टेंडर में गड़बड़ी हुई या नहीं, सवाल यह है कि क्या टेंडर खुलने से पहले ही यह तय कर लिया गया था कि काम किस कंपनी को मिलना है। बालोद जिले में प्रस्तावित नेशनल लेवल रोवर-रेंजर जंबूरी 2026 के आयोजन को लेकर सामने आए हालात इसी ओर इशारा कर रहे हैं।

सुबोध हरितवाल ने बताया कि जानकारी के अनुसार जंबूरी आयोजन का टेंडर 03 जनवरी को सुबह 12 बजे जेम पोर्टल पर खुलना था, लेकिन इससे पहले ही आयोजन स्थल शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज बालोद में एक निजी कंपनी ने काम शुरू कर दिया। मौके पर भारत किराया भंडार के ट्रक, सामग्री और श्रमिकों की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि काम पूरी तैयारी के साथ शुरू हो चुका है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि जब टेंडर प्रक्रिया पूरी ही नहीं हुई थी, तो कंपनी को किसके आदेश पर काम शुरू करने की छूट मिली।

यह भी सवाल उठ रहा है कि जेम पोर्टल जैसी ऑनलाइन और कथित तौर पर पारदर्शी प्रणाली के बावजूद टेंडर की जानकारी पहले ही कैसे लीक हो गई। क्या टेंडर खुलने से पहले ही मंत्री गजेंद्र यादव और अधिकारियों ने कंपनी को यह भरोसा दे दिया था कि काम उसी को मिलेगा। यदि ऐसा है, तो फिर नियमों का पालन करते हुए टेंडर खुलने का इंतजार करने वाले अन्य निविदाकर्ताओं का क्या कसूर था और उनके साथ हुए संभावित नुकसान की भरपाई कौन करेगा।

सुबोध हरितवाल ने कहा कि मामले को और संदिग्ध तब बना दिया जब टेंडर दस्तावेज में दिए गए संबंधित अधिकारी के मोबाइल नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन तय समय पर फोन स्विच ऑफ मिला। सवाल यह भी है कि क्या अधिकारी जवाबदेही से बचने के लिए जानबूझकर संपर्क से दूर रहे। पूरे घटनाक्रम में बड़े पैमाने पर लेन-देन और पूर्व-निर्धारित ठेके की चर्चा भी सामने आ रही है।

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