बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के बेटे तोमन साहू ने अपनी शानदार उपलब्धि से देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। डौंडीलोहारा विकासखंड के ग्राम पंचायत अहिबरन नवागांव निवासी और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवान तोमन साहू ने दक्षिण कोरिया में आयोजित पैरा विश्व तीरंदाजी चैंपियनशिप में स्वर्ण और कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। उन्होंने कंपाउंड पुरुष व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक अपने नाम किया, जबकि जम्मू-कश्मीर की अंतरराष्ट्रीय पैरा तीरंदाज शीतल देवी के साथ कंपाउंड मिश्रित टीम स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल किया। उनकी इस उपलब्धि से बालोद जिले सहित उनके गृहग्राम में खुशी और गर्व का माहौल है।
नक्सली हमले में गंवाया पैर, लेकिन नहीं हारी हिम्मत
तोमन साहू की सफलता की कहानी संघर्ष, साहस और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। वह वर्ष 2017 से देश सेवा में जुटे हैं और CRPF की 209वीं कोबरा बटालियन में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। फरवरी 2022 में झारखंड के लोहरदगा जिले के पेशरार थाना क्षेत्र में नक्सलियों के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन डबल बुल के दौरान वह प्रेशर आईईडी की चपेट में आ गए थे। विस्फोट में उनके एक पैर में गंभीर चोट आई, जिसके कारण उन्हें अपना पैर गंवाना पड़ा। बाद में उन्हें कृत्रिम पैर लगाया गया।
इस हादसे के बावजूद तोमन ने हार मानने के बजाय अपने जीवन को नई दिशा दी और तीरंदाजी में अपनी प्रतिभा को निखारना शुरू किया। लगातार अभ्यास और मेहनत के दम पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। वर्तमान में उनकी पोस्टिंग रायपुर में है। तोमन को तीरंदाजी प्रतियोगिताओं की तैयारी के लिए CRPF मुख्यालय हैदराबाद और रायपुर स्थित कार्यालय से सहयोग मिल रहा है।

पुरुष कंपाउंड वर्ग में जीता स्वर्ण पदक
दक्षिण कोरिया में आयोजित विश्व पैरा तीरंदाजी चैंपियनशिप में तोमन साहू ने पुरुष कंपाउंड व्यक्तिगत वर्ग का खिताब जीतकर भारत को गौरवान्वित किया। फाइनल में उनका मुकाबला भारत के ही राकेश कुमार से होना था, लेकिन धनुष की पुली में तकनीकी समस्या के कारण पेरिस पैरालंपिक के कांस्य पदक विजेता राकेश कुमार को चार शॉट के बाद मुकाबले से हटना पड़ा। इसके बाद तोमन ने सटीक निशाने लगाते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।
विश्व चैंपियनशिप में पदार्पण करते हुए खिताब जीतना तोमन के लिए बड़ी उपलब्धि रही। वहीं, शीतल देवी के साथ मिश्रित टीम स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने अपनी सफलता में एक और उपलब्धि जोड़ दी।
चेक गणराज्य में भी दिखा चुके हैं दम
दक्षिण कोरिया में पदक जीतने से पहले तोमन साहू चेक गणराज्य में आयोजित अंतरराष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता में भी हिस्सा ले चुके हैं, जहां उन्होंने चौथा स्थान हासिल किया था। लगातार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी और बेहतर प्रदर्शन से उन्होंने साबित किया है कि शारीरिक चुनौतियां मजबूत इच्छाशक्ति के सामने बाधा नहीं बन सकतीं।
तोमन का लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के लिए अधिक से अधिक पदक जीतना है। इसके लिए वह लगातार अभ्यास कर रहे हैं।
गांव में खुशी की लहर, माता-पिता का बढ़ाया मान
तोमन साहू एक मध्यमवर्गीय किसान परिवार से आते हैं। उनके माता-पिता खेती-किसानी करते हैं। बेटे की अंतरराष्ट्रीय सफलता से परिवार के साथ-साथ पूरे गांव का सिर गर्व से ऊंचा हो गया है। अहिबरन नवागांव में उनकी उपलब्धि को लेकर उत्साह का माहौल है। उनके मित्र तामेश्वर सिन्हा सहित अन्य लोगों ने उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
तोमन साहू की उपलब्धि केवल पदकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करने का हौसला रखते हैं। नक्सली हमले में गंभीर चोट लगने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और अपने परिश्रम से अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर तिरंगा ऊंचा किया।

