मनोज राजपूत और देवभूमि पर कार्रवाई कर निगम और जिला प्रशासन हो गया ठंडा…न रजिस्ट्री पर बैन लगवा सके और न FIR

भिलाई। दुर्ग में पिछले दिनों दो बिल्डर पर कार्रवाई की गई। एक नाम है मनोज राजपूत ले-आउट तो दूसरे का नाम है देवभूमि। पहले मनोज राजपूत के साम्राज्य पर प्रशासन का बुलडोजर चला फिर देवभूमि के खिलाफ भी कार्रवाई की गई। अब मामला ठंडे बस्ते में पड़ गया है या डाल दिया गया है…?

ये सवालों के घेरे में है। क्योंकि प्रशासन से जुड़े अधिकारियों ने दावा किया था ये कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। वहीं जिन प्लॉट्स की रजिस्ट्री होने वाली है, उस पर बैन लगाया जाएगा। वहीं इस तरह के इलिगल काम करने वाले बिल्डर्स के खिलाफ एफआईआर भी कराई जाएगी।

मगर प्रशासन की दोनों बातें सिर्फ हवा में थी। क्योंकि ग्राउंड पर कुछ भी नहीं हुआ है। बुलडोजर चलाकर बड़े-बड़े दावे किए गए। उन पर काम नहीं हुआ। ऐसे में निगम और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।

मनोज राजपूत के खिलाफ क्या-कुछ कार्रवाई हुई थी, यह भी जानिए
नागपुर हाईवे के किनारे सैकड़ों एकड़ भूमि पर अवैध प्लाटिंग कर रहे जिले के जानेमाने बिल्डर मनोज राजपूत के खिलाफ जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की थी।

दुर्ग निगम प्रशासन, राजस्व विभाग और टाउन एंड कंट्री प्लान की संयुक्त टीम बुधवार सुबह मौके पर पहुंची थी। अवैध प्लाटिंग को हटाने की कार्रवाई की थी। टीम ने अवैध कॉलोनी के मुख्य द्वार से लेकर बाउंड्रीवाल और अन्य निर्माण को पूरी तरह से तोड़ दिया था।

दुर्ग निगम की ओर से जारी प्रेस रिलीज में बताया गया था कि, मनोज राजपूत लेआउट एंड डेवलपर्स के खिलाफ अवैध प्लाटिंग को लेकर लम्बे समय से शिकायत प्राप्त हो रही थी। इसे लेकर निगम प्रशासन ने बिल्डर को अवैध प्लाटिंग हटाने को लेकर नोटिस जारी किया था। इसके बाद भी मनोज राजपूत पैमाने पर यह कार्य कर रहा है।

उसने निगम की नोटिस पर ध्यान भी नहीं दिया। इसलिए कलेक्टर के निर्देश पर नगर पालिक निगम दुर्ग, राजस्व विभाग दुर्ग और टाउन एवं कंट्री प्लान के अधिकारियों ने मिलकर एक संयुक्त टीम बनाई। टीम के सभी अधिकारी और कर्मचारी भारी पुलिस बल के साथ मनोज राजपूत द्वारा बसाई जा रही अवैध कॉलोनी में जा पहुंचे।

बन गया था माहौल, लेकिन अब फिर से ठंडा
टीम को आता देख वहां हड़कंप मच गया। इससे पहले की कोई बिल्डर कुछ कर पाता टीम ने कार्रवाई शुरू कर दी। टीम ने एक साथ दो से तीन JCBचलाकर अवैध निर्माण को तोड़ना शुरू कर दिया।

सबसे पहले कई लाख की लागत से बना कॉलोनी का मुख्य गेट तोड़ा गया। इसके बाद बाउंड्रीवाल को भी ढहाया गया।अवैध प्लांटिंग और बनाई गई सड़कों को हटाने का कार्य किया गया। तब माहौल बन गया था। अब मामला शांत हो गया।

प्लानिंग करके की गई थी कार्रवाई
उस कार्रवाई को करने से पहले निगम प्रशासन ने राजस्व विभाग दुर्ग और टाउन एवं कंट्री प्लान के अधिकारियों के साथ एक दिन पहले अवैध प्लाटिंग को हटाने की कार्य योजना तैयार की थी।

निगम आयुक्त व एसडीएम दुर्ग ने तय योजना को तहत सुबह ही भवन अधिकारी, स्वास्थ्य अधिकारी, अतिक्रमण अधिकारी के साथ अपने पूरे अमले के साथ निगम कार्यालय में बुलाया।

इसके बाद बिना किसी को कुछ बताए पूरा अमला सुबह 9 बजे अवैध प्लाटिंग की कार्रवाई करने पहंचे। कार्रवाई के दौरान तहसीलदार, निगम के भवन, स्वास्थ्य और अतिक्रमण प्रभारी के साथ मोहन नगर थाना प्रभारी, और दुर्ग थाना प्रभारी पूरी टीम के साथ महिला पुलिस बल भी मौजूद था।

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