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संविदा विद्युत कर्मचारियों के प्रदर्शन को बंद करने प्रशासन का नोटिस: 15 दिनों से चल रहा आंदोलन…16वें दिन कफन ओढ़कर कर्मचारी बन गए थे जिंदा लाश

संविदा विद्युत कर्मचारियों के प्रदर्शन को बंद करने प्रशासन का नोटिस: 15 दिनों से चल रहा आंदोलन…16वें दिन कफन ओढ़कर कर्मचारी बन गए थे जिंदा लाश

रायपुर। रायपुर के बुढ़ातालाब में शुक्रवार को जो देखने को मिला, वो शायद सबसे अलग था। विरोध प्रदर्शन का एक तरीका था। जिंदा लाश बनकर अपनी मांगें रखी और प्रदर्शन किया। हम बात कर रहे हैं राज्य संविदा विद्युत कर्मचारी संघ की। जो इन दिनों अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। कर्मचारियों ने अपने हड़ताल के 16वें दिन शुक्रवार को पॉवर कंपनी प्रबंधन के खिलाफ अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। कुछ कर्मचारी लाश बने, जिन्हें अन्य साथियों ने कफन ओढ़ाया। विरोध प्रदर्शन के इस अनोखे अंदाज से कर्मचारियों ने सरकार और पॉवर कंपनी प्रबंधन को मांगे पूरी करने के लिए जगाने की कोशिश की। विद्युत संविदा कर्मियों ने मांग की है कि विद्युत दुर्घटनाओं में जिन कर्मचारियों की मौत हुई है उनके परिवार के सदस्यों को अनुकंपा नियुक्ति दी जाए। साथ ही नियमितीकरण करें।

संघ के महासचिव उमेश पटेल का कहना है कि, जिला प्रशासन की ओर से एक लेटर आया है। जिसमें कहा गया है कि बुढ़ातालाब में संचालित धरना प्रदर्शन को बिना देरी किए हटाया जाए। नहीं तो एकपक्षीय कार्रवाई की जाएगी। पटेल का कहना कि, सरकार उनकी आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है। उन पर दबाव बनाया जा रहा है। हम अपनी मांगों को लेकर अडिग रहेंगे।

विद्युत संविदा कर्मियों का कहना है कि पिछले 16 दिनों से अपनी मांगों को लेकर रायपुर के बूढ़ातालाब के सामने धरने पर बैठे हैं। विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी बात शासन तक पहुचाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन न तो शासन सुन रही और न ही पॉवर कंपनी प्रबंधन। विद्युत संविदा कर्मियों ने कहा कि हमारे दुःख-दर्द को कोई नहीं समझ रहा है। अब तक कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति सुध तक लेने नहीं पहुंचे हैं। संविदा कर्मियों ने कहा कि, जिस तरह से कार्य क्षेत्र में दुर्घटनाओं का वे शिकार हो रहे हैं, उन्हें कफन भी नसीब नहीं होता है। इसी कारण आज कफन ओढ़कर विरोध प्रदर्शन किया गया है।

छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर कंपनी में लाइन परिचारक संविदा कर्मियों को दो साल के संविदा/परिवीक्षा अवधि पूर्ण करने के बाद नियमित करने की परंपरा है। लेकिन, राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण विद्युत संविदा कर्मियों का नियमितीकरण नहीं हो रहा है। संविदा कर्मी 2 साल में नियमित हो जाने की उम्मीद से अपनी जान जोखिम में डालकर काम करने के लिए इस विभाग में आ जाते हैं। आए दिन उनके साथ विद्युत दुर्घटनाएं हो जाती है। जिसमें सैकड़ों लोगों के अंग-भंग हो गए हैं और 25 से अधिक संविदा कर्मियों का निधन हो गया है। इसलिए विद्युत संविदा कर्मी अपने नियमितीकरण और अनुकंपा नियुक्ति का मांग कर रहे हैं।


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