राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के नवागांव निवासी रुखमणी साहू और उनके पति सोहन लाल साहू ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए मृत्यु के बाद अंगदान और देहदान करने का संकल्प लिया है। दंपति का यह निर्णय समाज में जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, संस्कारधानी राजनांदगांव जिले के ग्राम नवागांव (थाना सोमनी) निवासी रुखमणी साहू और सोहन लाल साहू ने यह निर्णय लिया है कि उनके निधन के बाद उनके अंग जरूरतमंद लोगों को जीवन देने के लिए दान किए जाएंगे, वहीं उनका शरीर मेडिकल शिक्षा और शोध कार्य के लिए समर्पित किया जाएगा। उनका मानना है कि मृत्यु के बाद भी किसी के काम आना सबसे बड़ा मानव धर्म है।

सोहन लाल साहू अब तक लगभग 14 बार रक्तदान कर चुके हैं और भविष्य में भी जरूरतमंदों की मदद के लिए तत्पर रहने का संकल्प लिया है। वहीं रुखमणी साहू भी समाज सेवा और जागरूकता के कार्यों में सक्रिय रहती हैं। दंपति ने यह भी संदेश दिया है कि लोग जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ या अन्य अवसरों पर अनावश्यक खर्च करने के बजाय रक्तदान, अंगदान और जरूरतमंदों की सहायता जैसे कार्यों को बढ़ावा दें।
दंपति ने बताया कि देश में हर साल लाखों मरीजों को अंग प्रत्यारोपण की जरूरत होती है, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण बहुत कम लोग अंगदान के लिए आगे आते हैं। ऐसे में समाज में इस विषय पर अधिक जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है।
रुखमणी साहू ने कहा कि अन्य राज्यों में अंगदान और देहदान करने वालों को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई देने की व्यवस्था है। उन्होंने Vishnu Deo Sai से भी आग्रह किया है कि Chhattisgarh में भी इस दिशा में ठोस कदम उठाया जाए ताकि लोग अधिक से अधिक संख्या में अंगदान और देहदान के लिए प्रेरित हों।
नवागांव के इस दंपति की पहल को क्षेत्र में सराहना मिल रही है। सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समाज के अधिक लोग इस तरह के संकल्प लें तो कई जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिल सकता है और मेडिकल शिक्षा को भी बड़ा सहयोग मिलेगा।
