हाईकोर्ट का अहम फैसला : जेल में बंद CRPF इंस्पेक्टर की बर्खास्तगी रद्द, बिना पिछले वेतन के मिलेगी बहाली

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जेल में बंद रहने के दौरान केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के एक इंस्पेक्टर को विभागीय जांच के बाद बर्खास्त किए जाने की कार्रवाई को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ माना है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने बर्खास्तगी और विभागीय अपील खारिज करने के आदेश निरस्त कर दिए हैं। कोर्ट ने संबंधित अधिकारी को सेवा में वापस लेने का निर्देश दिया है, लेकिन स्पष्ट किया है कि उन्हें पिछला वेतन नहीं दिया जाएगा। विभाग को नियमानुसार नए सिरे से कार्रवाई करने की छूट भी दी गई है।

मारपीट और हत्या के मामले में हुई थी गिरफ्तारी

याचिकाकर्ता वाई.के. सोलोमन मणिपुर के निवासी हैं और CRPF में इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत थे। वर्ष 2015 में वे अंबिकापुर में प्रशिक्षण ले रहे थे। इसी दौरान 2 अगस्त 2015 को अग्रसेन चौक पर संजय सिंह के साथ मारपीट की घटना हुई थी। बाद में इलाज के दौरान संजय सिंह की मौत हो गई। इस मामले में सोलोमन के खिलाफ हत्या सहित IPC की विभिन्न धाराओं में अपराध दर्ज किया गया और 8 अक्टूबर 2016 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

3 सितंबर 2018 को सेवा से किया गया था बर्खास्त

इसके बाद CRPF ने उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की और 3 सितंबर 2018 को सेवा से बर्खास्त कर दिया। वहीं, आपराधिक प्रकरण में अंबिकापुर के तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश ने 1 नवंबर 2021 को संदेह का लाभ देते हुए उन्हें बरी कर दिया था। इसके बाद उन्होंने बहाली के लिए विभाग में अपील की, लेकिन 11 मई 2022 को उनकी अपील खारिज कर दी गई।

जेल में होने की जानकारी के बावजूद पूरी की गई जांच

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शक्ति राज सिन्हा ने हाईकोर्ट में पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान सामने आया कि विभागीय जांच के समय सोलोमन केंद्रीय जेल अंबिकापुर में विचाराधीन बंदी के रूप में निरुद्ध थे। उन्हें 23 जुलाई 2018 को जेल में नोटिस दिया गया था। जवाब में उन्होंने बताया था कि जेल में बंद होने के कारण वे जांच में उपस्थित होकर अपना बचाव नहीं कर सकते। उन्होंने आपराधिक मुकदमे का फैसला आने तक विभागीय जांच स्थगित रखने का अनुरोध भी किया था। इसके बावजूद विभागीय अधिकारियों ने उनकी अनुपस्थिति में जांच पूरी कर ली। जांच में यह मान लिया गया कि उनके पास बचाव में पेश करने के लिए कोई साक्ष्य या गवाह नहीं हैं।

प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन माना

हाईकोर्ट ने पाया कि CRPF के स्थायी आदेश क्रमांक 20/2001 के पैरा 14 में भी कर्मचारी को बचाव का उचित अवसर देने का प्रावधान है। जेल में बंद होने की जानकारी और जांच स्थगित करने के अनुरोध के बावजूद याचिकाकर्ता को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया। एकलपीठ ने माना कि इस तरह की कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। इसी आधार पर कोर्ट ने 3 सितंबर 2018 के बर्खास्तगी आदेश और 11 मई 2022 के अपील खारिज करने वाले आदेश को निरस्त कर दिया।

बिना पिछले वेतन के सेवा में लेना होगा वापस

हाईकोर्ट ने विभाग को याचिकाकर्ता को सेवा में वापस लेने का निर्देश दिया है। हालांकि, इस अवधि का पिछला वेतन देने से इनकार किया गया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि विभाग चाहे तो कानून और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उनके खिलाफ नए सिरे से विभागीय कार्रवाई कर सकता है।

खबरें और भी हैं...
संबंधित

रायपुर में सूने मकान पर चोरों का धावा :...

रायपुर। राजधानी रायपुर के खमतराई थाना क्षेत्र में चोरों ने एक सूने मकान को निशाना बनाकर लाखों की चोरी को अंजाम दिया। रावांभाठा के...

कुबेरपुर बवाल मामले में बड़ा एक्शन : महिला की...

सूरजपुर। जिले के कुबेरपुर गांव में सड़क दुर्घटना के बाद हुए चक्काजाम और आगजनी की घटना को लेकर प्रशासन ने कार्रवाई की है। सरगुजा...

अमित शाह के दौरे से पहले CM साय का...

रायपुर। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के छत्तीसगढ़ दौरे से पहले प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस की ओर से शाह...

महादेव सट्टेबाजी ऐप पर सियासत गर्म : भूपेश बघेल...

रायपुर। दिल्ली के रामलीला मैदान में दो दिनों तक चले प्रदर्शन के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल रायपुर लौट आए हैं। राजधानी पहुंचते ही...