रायपुर के आयल एक्सट्रैक्शन फैक्ट्री में नाबालिग आदिवासी किशोरी की मौत: गांव में जब पहुंचा शव, तब मामले का हुआ खुलासा… आखिर कैसे हुई मौत? बाल श्रमिको से लिया जा रहा था फैक्ट्री में कार्य…!

– मृत बालिका जानकी मंडावी

रायपुर, कोंडागांव। छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में से अग्रवाल ऑयल एक्सट्रैक्शन प्राइवेट लिमिटेड तिल्दा में कार्य करने गई एक नाबालिग आदिवासी बालिका की करंट लगने से मौत हो गई है। घटना उस समय सामने आई जब मृत बालिका जानकी मंडावी उम्र लगभग 16 वर्ष पिता टोरका मंडावी का शव लेकर एंबुलेंस गृह ग्राम मथनीबेडा पंचायत वन शिरसी जिला कोंडागांव पहुंची, सप्ताह भर पहले ही घर से मजदूरी करने निकली बालिका का शव गांव पहुंचते ही पूरे गांव में मातम पसर गया, बालिका की असामयिक मौत की घटना से परिजनों के साथ ही पूरे गांव स्तब्ध है वहीं बताया जा रहा घटना के बाद अब प्रबंधन स्वजनों का मुंह बंद करा मामले को दबाने में लगा है। अग्रवाल ऑयल एक्सट्रक्शन लिमिटेड तिल्दा के एमडी अमित अग्रवाल ने बालिका की मौत के मामले पर कुछ भी कहने से साफ इनकार किया और मानवता के नाते उपचार कराने की बात कही।

अग्रवाल ऑयल एक्सट्रैक्शन प्राइवेट लिमिटेड तिल्दा

पत्रिका लुक की एक रिपोर्ट के अनुसार, स्वजनों के अनुसार मृत बालिका सहित गांव के आठ लोग ग्राम तिल्दा स्थित अग्रवाल आइल एक्सट्रैक्शन लिमिटेड में मजदूरी करने तकरीबन सप्ताह भर पहले गए थे, उसमें से कुछ लोग 16-17 साल के थे, दिनांक 25 दिसंबर की दोपहर को अचानक जानकी मंडावी बिजली करंट की चपेट में आकर पूरी तरह झुलस गई, आन्न फानन में फैक्ट्री संचालक व साथि श्रमिकों ने कालडा बर्न एंड प्लास्टिक यूनिट रायपुर लेकर पहुंचे, उपचार के बाद 29 दिसंबर को बालिका ने अस्पताल में दम तोड़ा, मौत के बाद बालिका के शव को एंबुलेंस में लेकर सभी साथी श्रमिक गांव पहुंचे।

बाल श्रमिको पर रोक का सरकारी आदेश महज कागजों तक सीमित है,विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा संस्थाओं का नियमित निरीक्षण नहीं करने से राज्य में संचालित कई बड़ी फैक्ट्रियां बाल श्रमिकों से कार्य करवा रहे है। तिल्दा की जिस फैक्ट्री में जानकी मंडावी नामक 16 वर्षीय बालिका की मौत हुई उसी फैक्ट्री में 15 -16 साल के अन्य श्रमिक भी कार्य करने गए थे। जो हादसे के बाद वापस गांव लौटे।

रोजगार के अभाव में जिले से श्रमिकों का पलायन थमने का नाम नहीं ले रहा,रोजगार की आस लेकर पलायन करने वालों में अधिकतर अशिक्षित आदिवासी और बाल श्रमिक भी शामिल है,बाल श्रम पर प्रतिबंध के बावजूद बड़ी फैक्ट्रियां भी बाल श्रमिकों से कार्य ले रहे।श्रमिकों की नियुक्ति के दौरान उनके दस्तावेजों की बिना जांच किए बड़ी फैक्ट्रियां भी बाल श्रमिकों तक को काम पर रख लेते हैं और बीमा कवर तक नहीं देते,हादसे में किसी की मौत होने पर भी श्रमिकों को मिलने वाली सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाता और अशिक्षित लोग भाग्य का फैसला मान बैठते है।

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