धमतरी। शहर के टिकरापारा इलाके में ईसाई प्रार्थना सभा को लेकर शनिवार को विवाद की स्थिति बन गई। प्रार्थना सभा के दौरान धर्मांतरण का आरोप लगाते हुए हिंदू संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया। इसके बाद ईसाई संगठन से जुड़े लोग भी मौके पर पहुंचे, जिसके चलते दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और नारेबाजी होने लगी।
विवाद की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। तहसीलदार की मौजूदगी में पुलिस बल तैनात किया गया और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की गई। हंगामे के चलते मुख्य मार्ग पर यातायात भी प्रभावित हुआ।
धर्मांतरण के आरोपों को लेकर बढ़ा विवाद
हिंदू संगठनों की ओर से आरोप लगाया गया कि प्रार्थना सभा की आड़ में धर्मांतरण की गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसी को लेकर कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया। दूसरी ओर, ईसाई पक्ष प्रार्थना सभा को धार्मिक गतिविधि बता रहा है। दोनों पक्षों के आमने-सामने आने के बाद मौके पर तनाव की स्थिति बनी। पुलिस ने हस्तक्षेप कर स्थिति को संभाला। धर्मांतरण से जुड़े आरोपों की मौके पर स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले में प्रशासन की जांच महत्वपूर्ण होगी।
पुलिस और प्रशासन ने संभाला मोर्चा
हंगामे की जानकारी मिलने पर तहसीलदार और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस बल की मौजूदगी में दोनों पक्षों को शांत कराने का प्रयास किया गया। अधिकारियों ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर निगरानी बढ़ा दी। धमतरी में प्रार्थना और चंगाई सभाओं को लेकर पहले भी विवाद सामने आते रहे हैं। सितंबर में जिले के कई चर्चों और प्रार्थना सभा स्थलों के बाहर गैर-ईसाइयों के प्रवेश को लेकर सूचना बोर्ड लगाए जाने का मामला भी सामने आया था।
दीपक बैज बोले- कानून के बाद भी नहीं रुक रहा धर्मांतरण तो जिम्मेदार कौन?
टिकरापारा की घटना को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि धर्मांतरण रोकने के लिए सरकार ने कानून बनाया है, इसके बावजूद यदि ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की है। दीपक बैज ने कहा कि, सरकार को यह स्वीकार करना चाहिए कि वह धर्मांतरण रोकने में सफल नहीं हो पा रही है और इसके लिए उसे माफी मांगनी चाहिए।
पहले से गरमाया हुआ है प्रार्थना सभा का मुद्दा
धमतरी में प्रार्थना सभाओं को लेकर पिछले कुछ समय से विवाद जारी है। हाल में जिले के करीब 40 चर्चों और प्रार्थना सभा स्थलों पर प्रवेश संबंधी सूचना बोर्ड लगाए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। ईसाई फोरम ने इसे विवाद और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए उठाया गया कदम बताया था, जबकि हिंदू संगठनों की ओर से प्रार्थना सभाओं में धर्मांतरण के आरोप लगाए जाते रहे हैं।
