रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य शिक्षा के विस्तार के लिए राज्य सरकार ने पांच नए चिकित्सा महाविद्यालयों (Medical Colleges) की घोषणा तो कर दी है, लेकिन इसके क्रियान्वयन की राह में ‘फैकल्टी की कमी’ का एक बड़ा रोड़ा खड़ा है। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) इसी महीने प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों का निरीक्षण करने आ रही है, और विशेषज्ञों का मानना है कि खाली पड़े पद सरकार की मुश्किल बढ़ा सकते हैं।

इन 5 शहरों में खुलेंगे नए मेडिकल कॉलेज
राज्य शासन ने प्रदेश के निम्नलिखित क्षेत्रों में नए मेडिकल कॉलेज खोलने का निर्णय लिया है:
- कवर्धा
- मनेंद्रगढ़
- जांजगीर-चांपा
- गीदम (दंतेवाड़ा)
- कुनकुरी (जशपुर)
इन कॉलेजों के लिए डीन की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, लेकिन अभी तक फैकल्टी की नियुक्ति नहीं हो पाई है।
स्वीकृत पदों में से आधे खाली, NMC निरीक्षण पर टिकी नजरें
आंकड़ों पर गौर करें तो प्रदेश के 10 पुराने चिकित्सा महाविद्यालयों में चिकित्सकों के कुल 2660 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 1290 पद अब भी खाली पड़े हैं। जब पुराने संस्थानों में ही फैकल्टी की भारी कमी है, तो नए कॉलेजों के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक कहां से आएंगे, यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है।
दूरी का पेंच: कुनकुरी (जशपुर) में प्रस्तावित कॉलेज को लेकर एक तकनीकी दिक्कत आ सकती है। नियमानुसार कॉलेज और अस्पताल की दूरी 10-15 किमी होनी चाहिए, जबकि कुनकुरी से जशपुर जिला अस्पताल की दूरी लगभग 50-52 किमी है।
CGPSC के जरिए 125 असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती
फैकल्टी की कमी को पाटने के लिए छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) के माध्यम से 125 असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती प्रक्रिया जारी है।
- इंटरव्यू: 28 मार्च तक चलेंगे।
- सुपर स्पेशलिटी: इनमें कार्डियोलॉजी, मेडिकल आंकोलॉजी, सर्जिकल आंकोलॉजी और कार्डियक एनेस्थेटिस्ट जैसे विशेषज्ञ पदों पर भी भर्ती की जा रही है।
- शेष रिक्तियां: भर्ती के बाद भी असिस्टेंट प्रोफेसरों के 332 रिक्त पदों की तुलना में कमी बनी रहेगी।
निष्कर्ष
NMC की टीम न केवल नए कॉलेजों की अधोसंरचना देखेगी, बल्कि पुराने कॉलेजों में डॉक्टरों की उपलब्धता की भी कड़ाई से जांच करेगी। यदि सरकार जल्द ही रिक्त पदों को भरने में सफल नहीं होती, तो नई मान्यताओं पर संकट मंडरा सकता है।