रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन प्रश्नकाल के दौरान प्रदेश के कई ज्वलंत मुद्दे गूंजे। सदन में औद्योगिक प्रदूषण, खतरनाक अपशिष्ट, वृक्षों के दुष्प्रभाव और कर्मचारियों की पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।

1. प्रदेश के 665 उद्योगों से निकल रहा है ‘खतरनाक अपशिष्ट’
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने प्रदेश में औद्योगिक प्रदूषण और खतरनाक अपशिष्ट (Hazardous Waste) का मुद्दा उठाया। उन्होंने सरकार से पूछा कि इन इकाइयों पर नियंत्रण की क्या व्यवस्था है?
जवाब में मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि छत्तीसगढ़ में वर्तमान में 665 ऐसी औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं जो खतरनाक अपशिष्ट उत्पन्न करती हैं। मंत्री ने स्पष्ट किया कि:
- इनमें से 19 बड़े उद्योगों में ‘ऑनलाइन एमीशन मॉनिटरिंग सिस्टम’ लगाया गया है।
- यह सिस्टम उद्योग अपने स्वयं के खर्च पर स्थापित करते हैं।
- सरकार इन प्रणालियों के माध्यम से प्रदूषण स्तर की नियमित निगरानी कर रही है।
2. छातिम (सप्तपर्णी) वृक्ष: हरियाली या सेहत के लिए खतरा?
भाजपा विधायक सुनील सोनी ने राजधानी सहित प्रदेश के अन्य हिस्सों में लगाए गए छातिम (सप्तपर्णी) वृक्षों से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान का मुद्दा उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या इसके दुष्प्रभावों को देखते हुए इसके रोपण पर रोक लगाई गई है?
मंत्री का जवाब: मंत्री ओपी चौधरी ने स्पष्ट किया कि फिलहाल छातिम वृक्ष के रोपण पर कोई औपचारिक रोक नहीं लगाई गई है और न ही वर्तमान में इन्हें हटाने की कोई कार्ययोजना प्रस्तावित है।
क्यों हो रहा है विरोध? छातिम (Alstonia scholaris) को ‘डेविल ट्री’ भी कहा जाता है। इसके परागकण (Pollen) अक्टूबर के महीने में अस्थमा, दमा और गंभीर एलर्जी का कारण बनते हैं। इसके जहरीले दूधिया रस के कारण मध्य प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों ने इसके रोपण पर पहले ही प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि, आयुर्वेद में इसकी छाल का उपयोग मलेरिया और त्वचा रोगों के इलाज में भी होता है।
3. OPS चयन: 2.91 लाख कर्मचारियों ने चुनी पुरानी पेंशन
विधायक पुन्नूलाल मोहले ने कर्मचारियों के एनपीएस (NPS) से ओपीएस (OPS) में स्विच करने का मामला उठाया। उन्होंने पूछा कि अब तक कितने कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना को अपनाया है।
मंत्री ने जानकारी दी कि प्रदेश के कुल 2,91,797 अधिकारी-कर्मचारियों ने ओपीएस का चयन किया है। वर्तमान में पेंशन व्यवस्था निर्धारित सरकारी नियमों के तहत सुचारू रूप से संचालित हो रही है।