रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के प्रश्नकाल में शुक्रवार को राजधानी रायपुर की हरियाली और जन-स्वास्थ्य से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा गरमाया। रायपुर पश्चिम के विधायक सुनील सोनी ने शहर में बड़ी संख्या में लगाए गए सप्तपर्णी (छातिम) वृक्षों के दुष्प्रभावों को लेकर मोर्चा खोला। उन्होंने सदन में दावा किया कि इन पेड़ों के परागकणों के कारण नागरिकों में अस्थमा और गंभीर एलर्जी जैसी सांस की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। विधायक सोनी ने मांग की कि नई कॉलोनियों और शहरी क्षेत्रों में इन पेड़ों के रोपण पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए और जो पेड़ पहले से लगे हैं, उन्हें हटाने की अनुमति दी जाए।

भविष्य में रोपण पर रोक, कोनोकार्पस पर भी सख्ती
सदन में चर्चा का जवाब देते हुए वन एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि हालांकि विभाग के पास अभी छातिम के हानिकारक प्रभावों पर कोई ठोस वैज्ञानिक रिसर्च नहीं है, लेकिन जनभावनाओं और अन्य राज्यों के अनुभवों को देखते हुए भविष्य में सप्तपर्णी के पौधे नहीं लगाए जाएंगे। मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि कोनोकार्पस नामक पेड़ के नुकसानदेह होने के वैज्ञानिक प्रमाण मिल चुके हैं, इसलिए सरकार इसके रोपण पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में ठोस पहल कर रही है।
वैज्ञानिकों की टीम करेगी जांच
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस संवेदनशील मुद्दे पर एक जांच कमेटी बनाने का सुझाव दिया। इस पर मंत्री ओपी चौधरी ने सहमति जताते हुए कहा कि विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों की एक टीम गठित की जाएगी जो इन वृक्षों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों का गहन अध्ययन करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना वैज्ञानिक आधार के हरे-भरे पेड़ों को काटना उचित नहीं है, लेकिन रिपोर्ट के आधार पर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।
विधायकों ने जताई चिंता: “इंसान बीमार हों तो ऐसी हरियाली किस काम की?”
चर्चा के दौरान विधायक धर्मजीत सिंह ने भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जो पेड़ इंसानों की सेहत के लिए खतरा बन रहे हैं, उन्हें बचाने का कोई औचित्य नहीं है। सदन में इस बात पर सहमति दिखी कि शहर के सौंदर्यीकरण के साथ-साथ नागरिकों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।