महासमुंद। जिले से नक्सल मोर्चे पर एक बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान के तहत बीबीएम डिवीजन के 15 सशस्त्र माओवादियों ने हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा में वापसी की है। इनमें 9 महिला और 6 पुरुष नक्सली शामिल हैं। सभी ने अपने अत्याधुनिक हथियारों के साथ पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण किया।
आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सली प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के ओडिशा स्टेट कमेटी के पश्चिमी सब जोन के अंतर्गत बरगढ़-बलांगीर-महासमुंद डिवीजन से जुड़े थे। कुल 15 माओवादियों पर 73 लाख रुपये का इनाम घोषित था।

वरिष्ठ माओवादी ने भी छोड़ी हिंसा
सबसे वरिष्ठ आत्मसमर्पित नक्सली विकास उर्फ सुदर्शन उर्फ जंगू उर्फ बावन्ना उर्फ राजन्ना (57) है, जो स्टेट कमेटी सदस्य और बीबीएम डिवीजन प्रभारी था। उसने एके-47 के साथ आत्मसमर्पण किया। इसके अलावा 2 डिविजनल कमेटी सदस्य, 5 एरिया कमेटी सदस्य और 7 प्लाटून सदस्य शामिल हैं।
अत्याधुनिक हथियार किए जमा
आत्मसमर्पण के दौरान कुल 14 आधुनिक हथियार सुरक्षा बलों के हवाले किए गए। इनमें
- 3 AK-47
- 2 SLR
- 2 INSAS
- 4 थ्री-नॉट-थ्री
- 3 बारह बोर बंदूकें शामिल हैं।
संवाद और पुनर्वास नीति का असर
पुलिस द्वारा लगातार संवाद, पोस्टर, बैनर, आकाशवाणी और पुनर्वास नीति के प्रचार-प्रसार के जरिए नक्सलियों से हिंसा का रास्ता छोड़ने की अपील की जा रही थी। पूर्व में आत्मसमर्पण कर चुके साथियों को पुनर्वास योजना का लाभ लेते देख इन माओवादियों ने भी मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने बताया कि संगठन में बढ़ती कठिनाइयों और जीवन के संकटों के कारण उन्होंने यह कदम उठाया।
रायपुर और संबलपुर रेंज नक्सलमुक्त घोषित
अधिकारियों के अनुसार इस आत्मसमर्पण के बाद ओडिशा स्टेट कमेटी का पश्चिमी सब जोन पूरी तरह समाप्त हो गया है। इसके साथ ही रायपुर पुलिस रेंज और ओडिशा का संबलपुर रेंज भी नक्सलमुक्त घोषित किया गया है।
अधिकारियों ने कहा कि मार्च 2026 तक नक्सलवाद के समूल उन्मूलन के लक्ष्य की दिशा में यह एक निर्णायक और बड़ी रणनीतिक सफलता है। यह आत्मसमर्पण न केवल महासमुंद जिले बल्कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।