महादेव ऑनलाइन सट्टा एप केस : बिलासपुर कोर्ट का बड़ा फैसला, संदिग्ध बैंक खाते अनफ्रीज करने से इनकार

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित महादेव ऑनलाइन सट्टा एप मामले में बिलासपुर कोर्ट ने बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क से जुड़े बैंक खातों को अनफ्रीज करने की मांग खारिज करते हुए साफ कहा कि जिन खातों का इस्तेमाल संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और अपराध से अर्जित रकम के ट्रांजेक्शन में हुआ हो, उन्हें जांच पूरी होने तक अनफ्रीज नहीं किया जा सकता।

कोर्ट के इस फैसले को जांच एजेंसियों के लिए बड़ी राहत और ऑनलाइन सट्टेबाजी के खिलाफ कड़ा संदेश माना जा रहा है। मामले की सुनवाई के दौरान जांच एजेंसियों ने अदालत को बताया कि महादेव ऑनलाइन सट्टा एप के जरिए करीब 50 करोड़ रुपये से अधिक का संदिग्ध वित्तीय लेन-देन किया गया है। इस नेटवर्क के संचालन के लिए कई बैंक खातों का उपयोग किया गया, जिन्हें जांच के दौरान फ्रीज किया गया था।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, पूरा नेटवर्क शेल कंपनियों और फर्जी बैंक खातों के माध्यम से संचालित किया जा रहा था। पुलिस का दावा है कि अवैध सट्टेबाजी से जुड़े पैसों को छिपाने और ट्रांजेक्शन को इधर-उधर करने के लिए कई लोगों के नाम पर बैंक खाते खोले गए थे।

बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

मामले की जांच के दौरान कुछ बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आई है। आरोप है कि आईसीआईसीआई बैंक के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से खाताधारकों के नाम पर फर्जी तरीके से खाते खोले गए। इसके लिए ओटीपी और दस्तावेजों का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया गया। पुलिस अब बैंकिंग सिस्टम के दुरुपयोग और संभावित साठगांठ की भी गहन जांच कर रही है।

कोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलील खारिज की

याचिकाकर्ता विकास कुमार सिंह ने अदालत में दलील दी थी कि वह मामले में सीधे तौर पर आरोपी नहीं हैं और पुलिस जरूरी दस्तावेज व साक्ष्य जुटा चुकी है, इसलिए खाते को फ्रीज रखने का कोई औचित्य नहीं है। हालांकि अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है और संबंधित खातों का उपयोग कथित तौर पर अवैध गतिविधियों में हुआ है। ऐसे में खातों को अनफ्रीज करना जांच को प्रभावित कर सकता है। अदालत ने यह भी माना कि प्रथम दृष्टया यह मामला गंभीर आर्थिक अपराध और संगठित ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क से जुड़ा हुआ है।

निचली अदालत के फैसले को भी बरकरार रखा

इससे पहले न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत ने भी खाते को अनफ्रीज करने की याचिका खारिज कर दी थी। बाद में सत्र न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका दायर की गई, लेकिन वहां भी निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए राहत देने से इनकार कर दिया गया।

मुख्य आरोपी समेत कई लोगों पर केस दर्ज

तारबाहर पुलिस ने मामले में मुख्य आरोपी रजत जैन और उसके सहयोगियों के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस का आरोप है कि आरोपियों ने संगठित तरीके से ऑनलाइन सट्टेबाजी का नेटवर्क खड़ा कर कई लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाए और उनके जरिए अवैध लेन-देन को अंजाम दिया।

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