नई दिल्ली / रायपुर: एमएसएमई समाधान पोर्टल पर सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के लंबित भुगतानों और एमएसईएफसी (MSEFC) में जारी मामलों को लेकर रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा में सवाल उठाया। सांसद के सवाल का जवाब देते हुए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने संसद को अवगत कराया कि सूक्ष्म और लघु उद्योग सुविधा परिषदों में वर्तमान में करोड़ों रुपये के मामले न्यायिक प्रक्रिया से गुजर रहे हैं।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमियों के हितों की अनदेखी किसी भी कीमत पर नहीं की जाएगी। संसद में दी गई जानकारी के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
- देशभर में लंबित मामले: वर्ष 2017 में शुरू हुए एमएसएमई समाधान पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, 30 जुलाई 2026 तक ₹21,030 करोड़ की राशि से जुड़े कुल 90,756 मामले एमएसईएएफसी में न्याय निर्णय के विभिन्न चरणों में हैं।
- छत्तीसगढ़ की स्थिति: प्रदेश में अनुसूचित जाति/जनजाति के उद्यमियों से संबंधित मामलों सहित कुल 784 आवेदन लंबित हैं, जिनमें से 432 मामले सीधे तौर पर सूक्ष्म उद्योगों से जुड़े हैं।
- जेम और ट्रेड्स का एकीकरण: गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) को व्यापार प्राप्त छूट प्रणाली (TReDS) के साथ एकीकृत किया जा चुका है। इससे एमएसएमई को त्वरित भुगतान के लिए इनवॉइस डिस्काउंटिंग की सुविधा मिल रही है।
- ऑनलाइन विवाद समाधान (ODR Portal): विलंबित भुगतानों के त्वरित समाधान के लिए 27 जून 2025 को ओडीआर (ODR) पोर्टल की शुरुआत की गई है। इस डिजिटल तंत्र के माध्यम से औपचारिक न्यायिक प्रक्रिया से पहले ही क्रेता और विक्रेता के बीच मध्यस्थता, सुलह या बातचीत से विवाद सुलझाने की सुविधा दी जा रही है।

रायपुर सांसद ने विश्वास जताया कि डिजिटल तकनीक और पूर्व-मध्यस्थता तंत्र के माध्यम से उद्यमियों के भुगतानों में तेजी आएगी और उनका समय व पैसा दोनों बचेगा।

