भिलाई बचाओ पदयात्रा : अंतिम दिन कांग्रेसियों को राजभवन से पहले पुलिस ने रोका, प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति के नाम राजपाल को सौंपा ज्ञापन

भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) और भिलाई टाउनशिप को बचाने की मांग को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी भिलाई द्वारा निकाली गई चार दिवसीय पदयात्रा बुधवार को समाप्त हुई। अंतिम दिन राजभवन से करीब पांच किलोमीटर पहले राजकुमार कॉलेज के पास पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर पदयात्रा को रोक दिया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। काफी देर तक चले गतिरोध के बाद प्रशासन ने 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को राजभवन जाने की अनुमति दी।

जिला कांग्रेस कमेटी भिलाई के अध्यक्ष मुकेश चंद्राकर के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने राजभवन पहुंचकर राज्यपाल को राष्ट्रपति के नाम 17 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बीएसपी के कर्मचारियों, सेवानिवृत्त कार्मिकों और भिलाई टाउनशिप से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग की गई।

पदयात्रा की शुरुआत टाटीबंध से वंदे मातरम गीत के साथ हुई। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हाथों में पार्टी का ध्वज लेकर बीएसपी को बचाने और निजीकरण के विरोध में नारे लगाए। रास्ते में कई स्थानों पर पदयात्रियों का फूल-मालाओं से स्वागत भी किया गया। पदयात्रा में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया।

राजकुमार कॉलेज के समीप बैरिकेडिंग पर कार्यकर्ताओं ने आगे बढ़ने का प्रयास किया, जिस पर पुलिस ने उन्हें रोक दिया। कुछ कार्यकर्ता बैरिकेडिंग पार करने में सफल भी हुए, लेकिन बाद में उन्हें रोक लिया गया। प्रशासन और कांग्रेस नेताओं के बीच चर्चा के बाद 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को राजभवन भेजा गया।

ये हैं प्रमुख मांगें

कांग्रेस ने राष्ट्रपति के नाम सौंपे ज्ञापन में बीएसपी कर्मचारियों के लंबित वेतन पुनरीक्षण और 39 माह के एरियर का भुगतान, संयंत्र में चोरी की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई, टाउनशिप के आवास खाली कराने की प्रक्रिया पर रोक, सेवानिवृत्त कर्मचारियों के आवास अधिकार बहाल करने, सेक्टर-9 अस्पताल और बीएसपी अस्पताल के निजीकरण की प्रक्रिया रोकने, नियमित भर्ती शुरू करने, छत्तीसगढ़ के युवाओं को भर्ती में प्राथमिकता देने, बीएसपी स्कूलों को लीज पर देने पर रोक लगाने, टाउनशिप की सड़क, पानी और सीवरेज व्यवस्था में सुधार सहित कुल 17 मांगें रखीं।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि इन मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो भविष्य में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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