अंबिकापुर। जिले के बतौली क्षेत्र में कॉलेज छात्रा के साथ आपत्तिजनक हालत में मिले संविदा शिक्षक पर शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले की जांच पूरी होने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में पदस्थ संविदा व्याख्याता की सेवा समाप्त कर दी है।
विभागीय आदेश में कहा गया है कि शिक्षक के इस कृत्य से न केवल स्कूल की गरिमा भंग हुई है, बल्कि शिक्षा विभाग की छवि भी धूमिल हुई है। जानकारी के अनुसार, सुरेश कुमार जायसवाल स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय बतौली में संविदा व्याख्याता के रूप में पदस्थ था। 24 अप्रैल की रात वह अपनी कार में कॉलेज की एक छात्रा के साथ संदिग्ध और आपत्तिजनक स्थिति में पाया गया था।

बताया जा रहा है कि रात के समय क्षेत्र में खड़ी संदिग्ध कार को देखकर कुछ स्थानीय युवकों को शक हुआ। जब उन्होंने पास जाकर देखा तो कार के अंदर शिक्षक और छात्रा आपत्तिजनक हालत में मिले। इसके बाद युवकों ने घटना का वीडियो बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
वीडियो वायरल होने के बाद मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया। लोगों ने शिक्षक के आचरण पर सवाल उठाए और शिक्षा विभाग से कार्रवाई की मांग की। मामले की लिखित शिकायत बतौली के शांतिपारा निवासी और भाजपा किसान मोर्चा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य अमित गुप्ता ने जिला शिक्षा अधिकारी से की थी। शिकायत में कहा गया था कि शिक्षक पद पर रहते हुए इस तरह का व्यवहार शिक्षा व्यवस्था की गरिमा के खिलाफ है और इससे विद्यार्थियों तथा समाज में गलत संदेश जाता है।
शिकायत मिलने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए थे। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा चार सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी। समिति में बतौली और सीतापुर के सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी (एबीईओ) समेत अन्य अधिकारियों को शामिल किया गया था। जांच समिति ने वायरल वीडियो, स्थानीय लोगों के बयान और संबंधित तथ्यों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार की। जांच में शिक्षक के आचरण को विभागीय नियमों और सेवा शर्तों के विपरीत माना गया।
डीईओ ने जारी किया सेवा समाप्ति आदेश
जांच रिपोर्ट मिलने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने संविदा शिक्षक सुरेश कुमार जायसवाल की सेवा समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया। आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि शिक्षक का आचरण शैक्षणिक संस्थान की गरिमा के अनुरूप नहीं था। विभाग ने माना कि इस घटना से स्कूल की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है और शिक्षा विभाग की छवि भी प्रभावित हुई है। इसी आधार पर संविदा सेवा समाप्त करने की कार्रवाई की गई।