क्वालिटी एजुकेशन के लिए दुर्ग में बड़ा फैसला: अब जिलास्तर पर सेट होंगे मासिक परीक्षा के पेपर…हर महीने रिजल्ट का किया जाएगा रिव्यू, कलेक्टर ने बैठक में दिए कई निर्देश

भिलाई। जिला स्तर पर भी मासिक परीक्षा के पेपर सेट होंगे। इनके रिजल्ट को विभिन्न श्रेणियों में बांटा जाएगा। जिन विद्यालयों के नतीजे खराब होंगे। वहां रिजल्ट बेहतर करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। यह निर्देश कलेक्टर पुष्पेंद्र मीणा ने दिये।

मीणा ने कहा कि मासिक परीक्षा के नतीजों के आधार पर इस बात का बेहतर तरीके से आंकलन किया जा सकेगा कि किन स्कूलों में रिजल्ट इंप्रूव करने के लिए अधिक ध्यान दिये जाने की जरूरत है। विभिन्न स्कूलों में रिजल्ट खराब होने के अनेक कारण हो सकते हैं।

कम रिजल्ट वाले स्कूल के शिक्षकों से चर्चा की जाएगी ताकि इसका कारण जान सकें और प्रभावी नतीजों के लिए काम किया जा सके। कलेक्टर ने कहा कि कभी कभी शिक्षकों की मेहनत के बावजूद रिजल्ट खराब हो सकता है।

इसके कारण की गंभीर समीक्षा की जरूरत होगी। हम सब बैठकर यह करेंगे और रिजल्ट बेहतर लाने प्रभावी रणनीति बनाकर काम करेंगे। बैठक में कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी से जिले में शिक्षा की स्थिति के बारे में भी पूछा। डीईओ श्री जायसवाल ने बताया कि कोविड में हुई आनलाइन पढ़ाई के चलते जो लर्निंग लास हुआ है। उसे पूरा करने की दिशा में हम सब कार्य कर रहे हैं।

हर सप्ताह अटेंडेंस की समीक्षा करेंगे कलेक्टर- कलेक्टर ने कहा कि यह देखा गया है कि आनलाइन पढ़ाई में बच्चों का लर्निंग लास हुआ है। आफलाइन पढ़ाई हमेशा प्रभावी होती है। कक्षाओं में अटेंडेंस अच्छी हो तो इसके नतीजे बेहतर आयेंगे। सभी स्कूलों की अटेंडेंस की मासिक रिपोर्ट बनेगी और ब्लाकवार इसकी समीक्षा होगी। कलेक्टर इसे हर सप्ताह देखेंगे।

शालात्यागी बच्चों को वापस लाने होगा कार्य- कलेक्टर ने कहा कि बच्चों को शाला से जोड़ना अहम जिम्मेदारी है। हमें यह देखना है कि बच्चे ड्रापआउट न हों। इसके लिए जो चिन्हांकित बच्चे हैं। उनके यहां शाला प्रबंधन के लोग स्वयं जाएं और पेरेण्ट्स को मोटिवेट करें।

उन्होंने कहा कि कोविड में जिन बच्चों ने अपने अभिभावकों को खो दिया है। उनकी बेहतर शिक्षा की व्यवस्था के लिए शासन ने महतारी दुलार योजना आरंभ की है। इसका लाभ ऐसे सभी बच्चों को मिल पाए, यह भी सुनिश्चित करना है।

मेधावी बच्चों को प्रमोट करने कोचिंग अच्छी बात- कलेक्टर ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को लेकर दो बातों पर सबसे ज्यादा फोकस रहेगा। कमजोर बच्चों को वापस ट्रैक पर लाना, इसके लिए मेहनत करना। जिन बच्चों में विलक्षण प्रतिभा है। उन्हें उभारने के लिए हर संभव संसाधन उपलब्ध करना।

इसके लिए जिले में डीएमएफ के माध्यम से कोचिंग की पहल की गई है। वो स्वागत योग्य है। एजुकेशन के लिए संसाधन उपलब्ध करना और इसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।

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