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दुर्गा पूजा के पहले BSP वर्कर्स को नहीं मिला बोनस: BWU में एक तरफ मान्यता का जश्न, वहीं दूसरी ओर संयंत्र कर्मियों के आंखो में आंसू…कहा- सेल के इतिहास में पहली बार हुआ ऐसा, बोनस के नाम पर भी बैठकों की नौटंकी शुरू

दुर्गा पूजा के पहले BSP वर्कर्स को नहीं मिला बोनस: BWU में एक तरफ मान्यता का जश्न, वहीं दूसरी ओर संयंत्र कर्मियों के आंखो में आंसू…कहा- सेल के इतिहास में पहली बार हुआ ऐसा, बोनस के नाम पर भी बैठकों की नौटंकी शुरू

भिलाई। BSP वर्कर्स यूनियन कार्यकारणी की बैठक में पहुंचे कर्मियों ने दुर्गा पूजा के पहले बोनस नही मिलने के खिलाफ अपना आक्रोश जताया है। कर्मियों ने कहा की सेल के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है की दुर्गा पूजा के पहले कर्मियों को बोनस नही मिला। संयंत्र कर्मियों ने कहा की दुर्गा पूजा के पहले बोनस न मिलना अमानवीय है। प्रबंधन और एनजेसीस समिति ने कर्मियो के भावना का आदर नहीं किया। कही मान्यता का जश्न है तो कही यूनियन मात्र कर्मियों को दिखाने के लिए गेट पर अर्थहीन प्रदर्शन कर रही है। जिसका परिणाम शून्य है।

BSP वर्कर्स यूनियन कार्यकारणी की बैठक में पहुंचे कर्मियों ने निम्न पॉइंट्स में अपना विरोध दर्ज किया:

बैठकों पर बैठकों के दौर से ही डूबा रहा 39 महीने का एरियस अब बोनस भी बैठको के चपेट में
इसी प्रकार के लगातार होने वाले बैठको के चलते ही 39 महीने का एरियस संयंत्र कर्मियों को नही मिला। कर्मी हर बैठक में आस लगाते रह गए पर अंत में परिणाम शून्य आया। बैठकों पर बैठकों के दौर से नेताओ का टी ए, डी ए बनता रहा और कर्मी खाली हाथ रह गए। अब बोनस के नाम पर भी बैठकों की नौटंकी चालू हो गई है।

यूनियन चुनाव के वादे बस चुनावी वादे रह गए
यूनियन चुनाव नेता ऐसा वादा कर रहे थे जिससे ऐसा लग रहा था की अगस्त माह में कर्मी मालामाल हो जाएंगे पर अब एरियस और बकाया राशी तो छोड़ो कर्मियों को बोनस भी नसीब नही हो रहा है।

50 ग्राम सोना तो दूर 50 हजार बोनस नहीं दिला पा रहे है एनजेसीसी नेता
यूनियन चुनाव में ड्यूटी आते जाते कर्मियों के कान पर एक ही आवाज गूंजती थी की हर कर्मी को मिलेगा 50 ग्राम सोना। आज सोना तो दूर रहा 50 हजार बोनस भी नसीब नही हो रहा है। 50 ग्राम सोना की गूंज इतना ज्यादा थी की बी एस पी कर्मियों के घरों में भी 50 ग्राम सोना मिलने की गूंज थी पर आज कर्मियों को बोनस के भी लाले पड़ रहे है।

जब गेट में आंदोलन करके ही हक लेना है तो एनजेसीस समिति और चुनाव का क्या महत्व
बी एस पी वर्कर्स यूनियन ने एनजेसीस नेताओ और यूनियन पर आरोप लगाया की यदि एरियस,बोनस जैसे मूलभूत मांगो के लिए भी कर्मियों को ही आंदोलन करके लेना पड़ेगा तो क्या एनजेसीएस की बैठके मात्र इनके नेताओ के टी ए , डी ए देने के लिए रखी जाती है ? और यूनियन चुनाव का क्या फायदा ?
किस आधार पर एनजेसीएस के नेता लोग ₹45000 की मांग कर रहे हैं, मान लो प्रबंधन कर्मियों को ₹45000 दे भी दे जोकि असंभव है फिर भी प्रबंधन नान एक्स कर्मियों के लिए मात्र 228 करोड़ ही होता है जबकि अधिकारियों को 800 करोड़ बांटने की सहमति मिल चुकी है।

एनजेसीएस नेताओ में ही है मतभेद और कर्मियों से करते है आह्वान की एक जुट होकर करो आंदोलन
एनजेसीएस संघठन खुद दो भागो में बटा हुआ है। एक भाग, समझोतो में बिना हस्ताक्षर के ही टी ए, डी ए ले रहा है। दूसरा हस्ताक्षर करके टी ए , डी ए ले रहा है। एक भाग गेट में प्रदर्शन की बात कर रहा है। वही दूसरा भाग इसके विरोध में खड़ा है। उम्मीद करते है की संयंत्र कर्मी एक जुट होकर इनके नेतृत्व में आंदोलन करे।

जब पूरे संयंत्र के कर्मी अपने 39 महीने के एरियस के लिए आंदोलन कर रहे थे तो इन्होंने हिस्सा नहीं लिया। कभी काम न करने वाले इनके महासचिव ने रिटायरमेंट के आखरी दिन होने के बावजूद न केवल ड्यूटी पर गए एवं वरन मशीन चला कर कर्मियों को चिढ़ाया। 39 महीने के एरियास के लिए प्रदर्शन पर गेट रोकने के नाम पर बी एस पी वर्कर्स यूनियन पदाधिकारियों पर कारवाही हो गई पर अब भी प्रबंधन खामोश है। इससे सिद्ध होता है की गेट में प्रदर्शन सयुक्त यूनियन और प्रबंधन के मिली भगत की नौटंकी है।

BSP वर्कर्स यूनियन बैठक में मुख्य रूप से BWU के अध्यक्ष उज्जवल दत्ता, महासचिव खूबचंद वर्मा ,कार्यकारी महासचिव दिल्लेश्वर राव, अतरिक्त महासचिव शिवबहादुर सिंह, उप महासचिव सुरेश सिंह, उपाध्यक्ष अमित बर्मन, विमल पांडे, मंगेश हरदास, सुभाष महाराणा, नरसिंह राव, ऋषभ घोष, मनोज डडसेना, लूमेष कुमार, ईमान सिन्हा, संदीप सिंह, भवानी शंकर, मलयाद्री, ढाल सिंह आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।


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