क्लाईमेट चेंज कॉन्क्लेव में शामिल हुए CM साय, बोले- छत्‍तीसगढ़ में भी जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौती… क्रेडा के स्टॉल में लोगों को ‘‘प्रधानमंत्री-सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना‘‘ की ली जानकारी

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ क्लाइमेट चेंज कॉन्क्लेव 2024 में विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गयी प्रदर्शनी का शुभारंभ करने के बाद स्टालों का निरीक्षण किया। उन्होंने हर स्टॉल पर जाकर वहां प्रदर्शित मॉडलों, जड़ी-बूटी, उपकरणों, हर्बल प्रोडक्ट की जानकारी ली। वन एवं पर्यावरण मंत्री केदार कश्यप भी उनके साथ थे। मुख्यमंत्री का पगड़ी और बिरन माला पहनाकर स्वागत किया गया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने क्लाईमेट चेंज कॉन्क्लेव (Climate Change Conclave) में कहा कि जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों के कारण अनियमित वर्षा, लंबे समय तक सूखा, चक्रवाती वर्षा, वर्षा ऋतु के समय परिवर्तन जैसी चुनौतियां पूरी दुनिया के साथ ही देश और प्रदेश के सामने भी हैं। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में प्रदेश की भूमिका और भविष्य की कार्ययोजनाओं के लिए यह कार्यशाला बहुत उपयोगी साबित होगी।

दर्पण सोसायटी जशपुर के सदस्यों ने स्टाल पर पहुंचने पर मुख्यमंत्री साय को सरई फूल से बना गुलदस्ता भेंट किया। सोसायटी के सदस्यों लोचन यादव ने बताया कि उनका समूह वन एवं वनोपजों के संरक्षण के लिए कार्य कर रहा है। वे ग्रामीणों को वनोपजों के संरक्षण के लिए प्रशिक्षित करने के साथ ही उसके प्रसंस्करण की तकनीक से भी अवगत कराते हैं। जिससे ग्रामीणों को उनके उत्पादों का सही दाम मिल सके।

छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा ) के स्टॉल पर इंडोर सोलर कुकिंग सिस्टम की यूनिट लगाई गयी थी। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि इस यूनिट में थर्मल बैटरी का उपयोग किया गया है जिससे सौर ऊर्जा को स्टोर कर लिया जाता है। इससे रात्रि के समय या बिजली नहीं होने पर भी स्टोर ऊर्जा का उपयोग कर खाना बनाया जा सकता है। स्टाल में प्रधानमंत्री-सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की भी जानकारी दी जा रही है।

कोरबा महामाया कृषक उत्पादक संघ के किसान इतवारी बंजारे ने मुख्यमंत्री को बताया कि उनका संघ कोरबा जिले के करतला ब्लॉक में काजू और ब्लैक राइस का उत्पादन कर रहा है। जहाँ काजू के लगभग 7500 पेड़ लगाए गए हैं और शुरूआती दौर में प्रति पेड़ 15 से 20 किलोग्राम काजू का उत्पादन होता है।

छत्तीसगढ़ हर्बल के स्टॉल पर अंजलि डहरिया ने मुख्यमंत्री को छत्तीसगढ़ हर्बल के अंतर्गत मिलने वाले उत्पादों आँवला जूस, मुरब्बा, कैण्डी, महुआ आचार, शहद जैसे अन्य उत्पादों के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि ये उत्पाद छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में मिलने वाले वनोपजों से राज्य की महिलाओं द्वारा ही निर्मित किया जाता है।

छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड के स्टॉल पर बी. राव गोडबोले ने मुख्यमंत्री को बताया कि उन्होंने बीजापुर के जंगलों में मिलने वाले वनौषधियों का संग्रहण किया। उन्होंने मुख्यमंत्री को काली अदरक और बोहार पेड़ के तने के बारे में बताया। बोहार पेड़ के तने का उपयोग आदिवासी अंचल में बनने वाले तुम्बा में पेय पदार्थ को ठंडा रखने के लिए किया जाता है।

छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परम्परा एवं औषधि बोर्ड के स्टॉल के निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को लेमन ग्रास और पामाशेसा के एसेंसियल ऑयल भेंट किये। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि इसका उपयोग सौंदर्य प्रसाधनों में सुगंध के लिए किया जाता है। मुख्यमंत्री साय ने भेंट के लिए अधिकारियों का धन्यवाद दिया।

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