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एक करोड़ की वसूली और सस्पेंशन पर दुर्ग में पोस्टेड अफसर को बड़ी राहत: 2014 में गड़बड़ी का हवाला…जांच कमेटी ने 14 कर्मियों को बनाया था जिम्मेदार, कुछेक को नोटिस, अब हाईकोर्ट ने दिया स्टे…सरकार को नोटिस

एक करोड़ की वसूली और सस्पेंशन पर दुर्ग में पोस्टेड अफसर को बड़ी राहत: 2014 में गड़बड़ी का हवाला…जांच कमेटी ने 14 कर्मियों को बनाया था जिम्मेदार, कुछेक को नोटिस, अब हाईकोर्ट ने दिया स्टे…सरकार को नोटिस

बिलासपुर। सिकल सेल इंस्टिट्यूट छत्तीसगढ़ रायपुर में प्रशिक्षण समन्वयक के पद पर पदस्थ आनंद देव ताम्रकर को हाईकोर्ट ने राहत दी है। ताम्रकार के खिलाफ उनके विभाग द्वारा अनाम शिकायत पर जांच का आदेश निकालकर निलंबित कर एक करोड़ से अधिक की वसूली के आदेश जारी कर दिया गया था।

अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी और अनादि शर्मा के माध्यम से दायर हुई रिट याचिका में हाईकोर्ट नें जांच, निलंबन और वसूली आदेश पर रोक लगाते हुए सचिव, स्वास्थ एवं परिवार कल्याण विभाग एवं अन्य से जवाब तलब किया है।

सिकल सेल इंस्टिट्यूट छत्तीसगढ़, रायपुर में आनंद देव ताम्रकर की प्रशिक्षण समन्वयक के पद पर नियुक्ति वर्ष 2014 में हुई थी। वर्ष 2021 में राहुल मिश्रा के नाम से उक्त विभाग को शिकायत प्राप्त हुई।

जिसमें विभाग में हुई फर्जी भर्ती, सिकलसेल मरीजों के लिए टोपी और टी-शर्ट खरीदी में ढाई से तीन लाख रूपये की वित्तीय अनियमितता जैसे आरोपों का जिक्र था।

उपरोक्त शिकायत की जांच एक जांच समिति गठित करके करवाई गयी, जिसमें जांच समिति ने स्वयमेव वर्ष 2017 से वर्ष 2021 तक की सम्पूर्ण जांच करने का निर्णय ले लिया। वर्ष 2022 में जांच समिति ने अपने प्रतिवेदन में यह स्पष्ट करते हुए कि बीते वर्षों में सिकलसेल इंस्टिट्यूट छत्तीसगढ़, रायपुर में कुल 1,15,89,611 रूपये की अनियमितता का दावा किया था।

जांच प्रतिवेदन में आनंद देव ताम्रकार के साथ करीब 14 अधिकारियों और कर्मचारियों का नाम उल्लेखित था, जिनमे सिर्फ कुछ लोगों के खिलाफ ही सेल इंस्टिट्यूट छत्तीसगढ़, रायपुर द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब माँगा गया था।

श्री ताम्रकर द्वारा जब अपने ही मामले से सम्बंधित दस्तावेजों की मांग की गई तो उस पत्र को ही उनका अंतिम जवाब मानते हुए डायरेक्टर जनरल, सिकलसेल इंस्टिट्यूट छत्तीसगढ़, रायपुर द्वारा उन्हें निलंबित कर उनकी सेवा को चंदुलाल चंद्राकर मेमोरियल मेडिकल कॉलेज, दुर्ग में अटेच कर दिया गया।

आनंद देव ताम्रकर द्वारा सिकल सेल इंस्टिट्यूट छत्तीसगढ़, रायपुर के द्वारा की गयी जांच, कारण बताओ नोटिस, वसूली और निलंबन आदेश से व्यथित होकर उन्होंने अपने अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी और अनादि शर्मा द्वारा हाईकोर्ट में याचिका प्रस्तुत की गई, जिसकी सुनवाई हाईकोर्ट के जस्टिस आर.सी..एस. सामंत की एकल बेंच में हुई।

मामले की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी के द्वारा यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि याचिकाकर्ता को बिना कोई सुनवाई का मौका दिए सिकल सेल इंस्टिट्यूट द्वारा याचिकाकर्ता के खिलाफ वसूली एवं निलंबन का आदेश जारी किया गया है।

जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धान्तों के विपरीत है। अधिवक्ताओं द्वारा यह तर्क भी दिया गया कि प्रतिवादियों द्वारा गलत ढंग से जांच करने के आदेश जारी किये गए थे और जांच के दौरान अपने क्षेत्राधिकार के बाहर जाकर जाँच/ कार्यवाही की गयी है।

श्री सिद्दीकी द्वारा कोर्ट को बताया गया कि राहुल मिश्रा जिनके नाम से शिकायत राज्य सरकार और सिकल सेल इंस्टिट्यूट छत्तीसगढ़, रायपुर द्वारा प्राप्त हुई थी, वह अनाम व्यक्ति नें राहुल मिश्रा के नाम का गलत इस्तेमाल करते हुए संदिग्ध तौर पर करी थी।

राहुल मिश्रा के द्वारा लिखे गए पत्रों और एफिडेविट माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया जिसमे श्री मिश्रा द्वारा बारंबार निवेदन किया गया था की उनके द्वारा कोई शिकायत नहीं की गई थी। और ऐसी किसी भी झूठी शिकायत जिनमे उनका नाम गलत रूप से इस्तेमाल किया गया है, उस पर कोई कार्यवाही नहीं की जाये।

अधिवक्ताओं द्वारा तर्क दिया गया कि राहुल मिश्रा के बताये सच को नकारते हुए प्रतिवादियों द्वारा सारी कार्यवाही को अंजाम दिया गया है। इसके अलावा केंद्रीय सतर्कता आयोग द्वारा जारी परिपत्र जिसमे निर्देश हैं, कि अनाम/ उपनाम से लिखे गए किसी भी शिकायत पर मंत्रालय/ विभाग/ या अन्य संस्थाओं द्वारा कोई भी कार्यवाही नहीं की जा सकेगी।

छत्तीसगढ़ राज्य शासन और पुलिस प्रशासन द्वारा भी केंद्रीय सतर्कता आयोग द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार निर्देश समय-समय पर जारी किये गए हैं।

याचिकाकर्र्ता प्रशिक्षण समन्वयक के पद पर कार्यरत थे और उनके पास उनके विभाग सम्बन्धी खरीदी का अधिकार नहीं है और याचिकाकर्ता के विरूद्ध की गयी पूरी कार्यवाही छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 और छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम, 1966 के विपरीत है।

उपरोक्त तर्कों के आधार पर माननीय जस्टिस आर.सी..एस. सामंत की एकल बेंच नें निलंबन के साथ जाँच और कारण बताओ नोटिस पर अगली तारीख तक रोक लगाते हुए सचिव, , स्वास्थ एवं परिवार कल्याण विभाग, अवर सचिव, चिकित्सा शिक्षा विभाग, संचालक, चिकित्सा शिक्षा संचालनालय, और महानिदेशक, सिकल सेल इंस्टिट्यूट छत्तीसगढ़, रायपुर से जवाब तलब किया गया है।


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