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बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से एक ऐसा अनोखा फैसला सामने आया है, जिसकी चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही है। अक्सर आपसी विवादों की जड़ समझी जाने वाली ‘चुगली’ पर नकेल कसने के लिए ग्राम मेढ़की के ग्रामीणों ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। अब गाँव में किसी की बात को तोड़-मरोड़कर यहाँ-वहाँ करने वाले ‘चुगलखोरों’ को 5,000 रुपये का आर्थिक दंड भुगतना होगा।

क्यों लिया गया यह अनोखा फैसला?
गुरुवार को हुई ग्रामीणों की ग्राम सभा में यह बात निकलकर आई कि छोटी-छोटी बातें, जब एक कान से दूसरे कान तक पहुँचती हैं, तो वे बड़े विवाद का रूप ले लेती हैं। इससे न केवल परिवारों के बीच दूरियां बढ़ती हैं, बल्कि गाँव का शांतिपूर्ण माहौल भी खराब होता है। आपसी भाईचारा बनाए रखने के लिए सर्वसम्मति से यह कड़ा नियम लागू किया गया है।

नशेड़ियों और हुड़दंगियों पर भी कसेगा शिकंजा
गाँव की बैठक में केवल चुगली ही नहीं, बल्कि सामाजिक अनुशासन को लेकर भी कुछ अन्य कड़े फैसले लिए गए:
- धार्मिक/सामाजिक भोज में नशा: यदि कोई व्यक्ति शराब पीकर सामाजिक या धार्मिक कार्यक्रमों (भोज आदि) में शामिल होता है, तो उस पर भी 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
- शांति व्यवस्था: ग्रामीणों का मानना है कि इन कड़े नियमों से गाँव में विवाद कम होंगे और अनुशासन बढ़ेगा।

नशे के खिलाफ मेढ़की का ‘सक्सेस मॉडल’
यह पहली बार नहीं है जब मेढ़की गाँव ने ऐसा साहसी कदम उठाया हो। करीब 5 साल पहले भी गाँव ने नशे के खिलाफ मोर्चा खोला था:
गाँव में शराब बेचने वालों पर 10,000 रुपये का जुर्माना तय किया गया था।
अवैध शराब की सूचना देने वाले को 1,000 रुपये का पुरस्कार देने का नियम बनाया गया था।
परिणाम: इन फैसलों का असर यह हुआ कि आज गाँव का माहौल काफी शांत और नशा मुक्त है।
“चुगली कई बार बड़े फसाद की जड़ होती है। हम चाहते हैं कि हमारे गाँव में आपसी प्रेम बना रहे, इसलिए यह सामूहिक दंड प्रक्रिया शुरू की गई है।” — ग्रामीण, ग्राम मेढ़की

