दुर्ग में अक्षय ऊर्जा पर मंथन: क्रेडा सदस्य विजय साहू बोले-सभी सरकारी दफ्तरों में हो अक्षय ऊर्जा, बिजली बचाने आज से ही करे पहल

भिलाई। ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) भारत सरकार के द्वारा जिला में छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) के सहयोग से शासकीय कार्यालय भवनों में ऊर्जा संरक्षण पर अर्द्धदिवसीय जागरूकता कार्यशाला का आयोजन होटल किंग्स फोर्ट मालवीय नगर दुर्ग में आज किया गया। जिसमें जिला के विभिन्न विभागों के विभाग प्रमुख एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। उक्त कार्यक्रम में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करते हुए ऊर्जा संरक्षण के संबंध में आवश्यक जानकारी प्राप्त की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ महादेव कावरे आयुक्त, दुर्ग संभाग एवं विजय साहू सदस्य (क्रेडा), द्वारा द्वीप प्रज्जवलीत कर कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। अतिथियों के स्वागत उपरांत स्वागत भाषण एवं ऊर्जा सरंक्षण विषय पर तथ्यात्मक जानकारी दी गई।

विजय साहू सदस्य क्रेडा रायपुर के द्वारा सभी कार्यालय भवन में ऊर्जा संरक्षण किये जाने की अनिवार्यतः पर जोर दिया गया, एवं जीवाश्म ईधन की सीमित उपलब्धता पर भी चिंता व्यक्त की गई, भविष्य में जीवाश्म ईधन से ऊर्जा बनाये जाने पर अधिक लागत आने तथा पर्यावरण पर विपरित प्रभाव पड़ने के विषय पर अवगत कराया गया।
महादेव कावरे, संभागायुक्त दुर्ग के द्वारा अपने उद्बोधन में अक्षय स्त्रोतों से उत्पन्न ऊर्जा को स्वच्छ और अधिक धारणीय बताया। उन्होंने ऊर्जा के नवनीकरणीय स्त्रातों के उपयोग के लिए आम नागरिकों को ज्यादा से ज्यादा प्रोत्साहित करने की बात कही। उन्होंने अधिकारिक डेटा के आधार पर बताया कि रिनिवल एनर्जी की लागत लगभग 15 पैसे पर यूनिट आ रही है। यदि महंगाई के इस दौर में आज हम रिनिवल एनर्जी का उपयोग ज्यादा से ज्यादा उपयोग करें तो निःसंदेह पर्यावरण सुरक्षा के साथ ही आर्थिक मंदी को कम करने में योगदान दे सकते हैं।
उन्होंने उपस्थित अधिकारियों को अवगत कराया कि संभाग अंतर्गत समस्त शासकीय भवनों पर ऊर्जा संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत नियमों का पालन करते हुए विभाग ऊर्जा संरक्षण के लिए कटिबद्ध हैं। इसके अंतर्गत एलईडी बल्ब, एलईडी लाईट, टी-5 बीएलडीसी पंखें की प्रतिस्थापना के साथ-साथ स्टार रेटेड ए. सी. से प्रतिस्थापित किये जाने पर जोर दिया साथ ही ए. सी. को 24 डिग्री तापमान पर ही उपयोग करने की बात कही।

कर्मचारियों को कार्यालय छोड़ने से पूर्व समस्त बिजली चलित उपकरणो के स्वीच को बंद करने हेतु प्रेरित किया, क्योंकि ऊर्जा की बचत ही ऊर्जा का उत्पादन है। सुदुर वनांचल क्षेत्रों में सौर ऊर्जा के माध्मय से सोलर पंप लगाकर कृषि कार्यों में सिंचाई का उपयोग किया जा रहा है तथा जल जीवन मिशन में सोलर पंप से ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। चूंकि पेयजल एवं सिचाई कार्य में अधिक बिजली की खपत होती है। जिसे सोलर पैनल स्थापित कर बचत किया जा सकता है, तथा पर्यावरण को होने वाले दुष्प्रभाव को भी रोका जा सकता है।

इसके अलावा अन्य उपस्थित क्रेडा के अधिकारियों द्वारा ऊर्जा दक्ष भवनो से संबंधित एनर्जी कन्सर्वेशन बिल्डिंग कोड के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि प्रदेश में ईसीबीसी कोड लागू करने हेतु प्रक्रियाधीन है और साथ ही साथ बड़े भवन जो कि 50 किलो वॉट से 60 किलो वॉट या उससे अधिक भार वाले भवनो में ऊर्जा संरक्षण बिल्डिंग कोड के नियम लागू किया जाना चाहिए।
विषय विशेषज्ञ के द्वारा अवगत कराया गया कि विद्युत उत्पादन में बहुत अधिक जीवाश्म ईंधन की आवश्यकता होती है, तथा पर्यावरण पर भी इसका बहुत अधिक दुष्प्रभाव पड़ता है। इस प्रकार उत्पादित विद्युत को एक स्थान से दूसरे स्थान भेजने पर बहुत अधिक विद्युत स्थानांतरण क्षय होता है, जो कि अपने आप में विद्युत का अपव्यय है। इसलिए उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि वो रिनिवल एनर्जी को ज्यादा से ज्यादा अपनाकर पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान दें।
इस अवसर पर दिनेश सिन्हा, विषय विशेषज्ञ, टी.आर. ध्रुव, जिला प्रभारी क्रेडा, अधीक्षण अभियंता भानु प्रताप, संतोष कुमार ध्रुव, कार्यपालन अभिंयता, कुशल तिवारी, प्रोजेक्ट कोर्डिनेटर, क्रेडा एवं अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

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