IPS GP Singh को मिली बड़ी राहत: हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच का फैसला, जीपी सिंह के खिलाफ दर्ज सभी FIR रद्द

बिलासपुर। सीनियर आईपीएस ऑफिसर जीपी सिंह को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से फिर बड़ी राहत मिली है। हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने राजद्रोह केस में सभी प्रोसिडिंग को रद्द कर दिया है। कांग्रेस सरकार में 1994 बैच के IPS जीपी सिंह पर राजद्रोह का केस दर्ज हुआ था। जीपी सिंह पर सरकार गिराने की साजिश रचने का आरोप लगा था। जिसके बाद उन्हें जनवरी 2022 में गिरफ़्तार कर लिया गया था।

1994 बैच के आईपीएस जीपी सिंह वर्तमान में बर्खास्त हैं। उनके खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो में आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया था। इसके अलावा भिलाई के सुपेला थाने में एक्सटॉर्शन का मामला और रायपुर में राजद्रोह का मामला भी दर्ज किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। तीनों मामलों में जीपी सिंह 120 दिन जेल में भी रहे थे। सभी मामलों को रद्द करने के लिए हाई कोर्ट में जीपी सिंह ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।

बुधवार को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र अग्रवाल की डिवीजन बेंच में मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई में चंडीगढ़ के सीनियर काउंसिल वर्चुअल उपस्थित हुए। जीपी सिंह के अधिवक्ताओं ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में बताया कि जिस व्यक्ति से गोल्ड सीज हुआ है उस व्यक्ति को एसीबी ने आरोपी नहीं बनाया है, जबकि उक्त गोल्ड को जीपी सिंह का बता उन्हें आरोपी बना दिया गया। जिस स्कूटी से गोल्ड की जब्ती बनाई गई है वे भी जीपी सिंह और उनके परिजनों के नाम पर रजिस्टर्ड नहीं है। इसके अलावा सुपेला में दर्ज एक्सटॉर्शन के मामले में बताया गया कि यह सालों बाद बदले की कार्यवाही के तहत दर्ज करवाई गई है। कई सालों बाद मामला दर्ज होने से मामला समझ से परे है। राजद्रोह के मामले में अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि जिन कटे फटे कागज के जीपी सिंह के ठिकाने से मिलने के आधार पर उन्हें राजद्रोह का आरोपी बनाया गया है। उन कागजों से कोई भी षड्यंत्र परिलक्षित नहीं होता। एंटी करप्शन ब्यूरो द्वारा अदालत में पेश किए गए जवाब में भी स्पष्ट है कि उक्त कागज के टुकड़ों की रेडियोग्राफी में कोई भी स्पष्टता नहीं है। मामले की सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने जीपी सिंह के खिलाफ दर्ज तीनों मामलों को रद्द कर दिया। याचिकाकर्ता की ओर सेचंडीगढ़ के सीनियर काउंसिल रमेश गर्ग वर्चुअल उपस्थित हुए। अधिवक्ता हिमांशु पांडेय ने फिजिकली उपस्थित होकर तर्क पेश किया।

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