रिसाली। नगर पालिक निगम रिसाली की महापौर के कार्यकाल के चार वर्ष पूर्ण होने पर अब राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। पार्षदों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने महापौर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए उन्हें हर मोर्चे पर ‘विफल’ करार दिया है। हाल ही में जारी एक तीखे पत्र में महापौर से नैतिकता के आधार पर त्यागपत्र की मांग की गई है।

“महापौर नहीं, सिर्फ पार्षद की तरह किया काम”
विपक्ष का आरोप है कि पिछले चार वर्षों में महापौर अपनी बड़ी जिम्मेदारी को समझने में नाकाम रही हैं। पत्र में कहा गया है कि उन्हें शहर के विकास के लिए चुना गया था, लेकिन वे केवल एक पार्षद के स्तर तक ही सीमित रह गईं। इसका सीधा खामियाजा रिसाली की जनता को भुगतना पड़ रहा है।

जवाब मांगते 5 तीखे सवाल
महापौर के सामने चुनौती रखते हुए उनसे राज्य सरकार की योजनाओं के इतर, निगम के स्तर पर किए गए कार्यों का हिसाब मांगा गया है:
शिक्षा: राज्य सरकार की योजनाओं को छोड़कर शिक्षा क्षेत्र में किए गए कोई 5 बड़े कार्य।
इन्फ्रास्ट्रक्चर: बुनियादी ढांचे के विकास के लिए निगम द्वारा किए गए 5 विशिष्ट कार्य।
महिला विकास: महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए निगम की अपनी कोई योजना।
युवा कल्याण: युवाओं के मार्गदर्शन और भविष्य के लिए उठाए गए ठोस कदम।
बजट घोषणाएं: बजट भाषण में किए गए वादों की जमीनी हकीकत और पार्षदों के सुझावों पर की गई कार्रवाई।

नैतिकता के आधार पर इस्तीफे की मांग
पत्र में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि यदि इन सवालों के संतोषजनक उत्तर नहीं हैं, तो महापौर को अपने पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। शहर सरकार को प्रत्येक मोर्चे पर विफल बताते हुए रिसाली की जनता के हित में उनसे पद छोड़ने का आग्रह किया गया है।

