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पेट फाड़ कर रेत दिया था गला, हाइटेक में बची जान…11 दिन की जद्दोजहद के बाद मिली अस्पताल से छुट्टी…

पेट फाड़ कर रेत दिया था गला, हाइटेक में बची जान…11 दिन की जद्दोजहद के बाद मिली अस्पताल से छुट्टी…

भिलाई। हाइटेक सुपरस्पेशालिटी हॉस्पिटल को एक ऐसे युवक की जान बचाने में सफलता मिली है जिसपर जानलेवा हमला हुआ था। हमलावरों ने न केवल उसका पेट फाड़ दिया था बल्कि उसका गला भी रेत दिया था। पंडरिया, राजनांदगांव के इस युवक को जब आधी रात को हाइटेक लाया गया तो वह शॉक की स्थिति में था। काफी रक्तस्राव हो चुका था। मुसीबत यह थी कि उसका ब्लड ग्रुप ओ-निगेटिव था।

हाइटेक के गैस्ट्रो सर्जन डॉ नवील कुमार शर्मा ने बताया कि 24 वर्षीय इस युवक की स्थिति को देखते हुए तत्काल इस रेयर ग्रुप के ब्लड का इंतजाम किया गया। उसके पेट में तीन बार चाकू से वार किया गया था। उसकी छोटी आंत का एक हिस्सा पेट से बाहर आकर फंस गया था और रक्तसंचार रुकने से उसमें सड़न शुरू हो चुकी थी। रात दो बजे मरीज की हालत स्थिर होने के बाद उसकी सर्जरी प्रारंभ की गई। सबसे बड़ी चुनौती उसकी अंतड़ियों को बचाने की थी। हमें छोटी आंत का 10 फीसदी भाग काट कर अलग करना पड़ा। छोटी आंत के 90 फीसदी भाग को सुरक्षित वापस पेट में डाल दिया गया। गर्दन को हालांकि पुरी तरह से रेत दिया गया था पर उसकी श्वांस नली को कोई नुकसान नहीं पहुंचा था। सुबह 5 बजे तक मरीज को खतरे से बाहर खींच चुके थे।

मरीज को 30 मार्च की रात को लाया गया था। 11 दिन की जद्दोजहद के बाद उसे सकुशल अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। गैस्ट्रो सर्जन डॉ नवील कुमार शर्मा के नेतृत्व में उनकी टीम ने इस सर्जरी को अंजाम दिया। इस टीम में निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ पल्लवी शेण्डे, इंटेंसिविस्ट डॉ सोनल वाजपेयी, मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ राजेश सिंघल तथा तकनीकी तथा सपोर्ट स्टाफ शामिल थे।


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